रामायण के किष्किंधा कांड के एक प्रसंग में उल्लेख मिलता है कि जब देवी सीता का रावण ने हरण कर लिया तो देवी सीता ने अपने आभूषण साड़ी के पल्लू में बांधकर फेंक दिया। यह आभूषण वानर राज सुग्रीव को मिले और इन्होंने अभूषणों को संभालकर रख दिया।
देवी सीता की पायलों को देखकर लक्ष्मण ने ऐसा क्या कहा कि भगवान राम रो पड़े
भगवान राम जब सीता को ढूंढते हुए मलय पर्वत पर पहुंचे जहां पर राजा सुग्रीव बालि के भय से अपने मंत्रियों और शुभचिंतकों के साथ विराजमान थे तब सुग्रीव ने देवी सीता के आभूषण राम जी को सौंप दिया।
देवी सीता की पायलों को देखकर लक्ष्मण ने ऐसा क्या कहा कि भगवान राम रो पड़े
इन आभूषणों को देखकर भगवान राम लक्ष्मण जी से पूछते हैं कि तुम देवी सीता के बाजूबंद, कर्णफूल, हार और पायलों को देखो क्या तुम इन्हें पहचानते हो। भगवान राम के इस प्रश्न को सुनकर लक्ष्मण जी रोते हुए कहते हैं।
देवी सीता की पायलों को देखकर लक्ष्मण ने ऐसा क्या कहा कि भगवान राम रो पड़े
नाहं जानामि केयूरे, नाहं जानामि कुण्डले। नूपुरे त्वभिजानामि नित्यं पादाभिवन्दनात्।। अर्थात हे प्रभु मैं देवी सीता के न तो बाजूबंद को जानता हूं, न उनके कुंडल पहचानता हूं। मैं तो देवी सीता के पैरों की वंदना करता हूं इसलिए मेरी दृष्टि हमेशा उनके चरणों रहती है इसलिए मैं केवल उनके चरणों में रहने वाले पायलों को पहचानता हूं।
देवी सीता की पायलों को देखकर लक्ष्मण ने ऐसा क्या कहा कि भगवान राम रो पड़े
लक्ष्मण जी की इन बातों को सुनकर भगवान राम के आंसू छलक जाते हैं और लक्ष्मण को गले लगाकर रोने लगते हैं।