वर्तमान सप्ताह का शुभारंभ मार्गशीर्ष कृष्णा पक्ष की पंचमी तिथि के साथ हो गया है। दिसंबर महीने का यह सप्ताह व्रत एवं त्योहारों के लिए खास है। सप्ताह की शुरुआत में कालाष्टमी व्रत है तो वहीं इसका अंत साल की अंतिम एकादशी सफला एकादशी के साथ हो रहा है। आइए इस सप्ताह के व्रत एवं त्योहारों पर डालते हैं एक नजर....
दिसंबर महीने के तीसरे हफ्ते के प्रमुख व्रत और त्योहार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
19 दिसंबर- कालाष्टमी
कालाष्टमी के दिन भगवान शिव का विग्रह रूप माने जाने वाले कालभैरव की पूजा का विशेष महत्व है। उन्हें शिव का पांचवा अवतार माना गया है। इनके दो रूप है पहला बटुक भैरव जो भक्तों को अभय देने वाले सौम्य रूप में प्रसिद्ध है तो वहीं काल भैरव अपराधिक प्रवृतियों पर नियंत्रण करने वाले भयंकर दंडनायक है।
भगवान भैरव के भक्तों का अनिष्ट करने वालों को तीनों लोकों में कोई शरण नहीं दे सकता। काल भी इनसे भयभीत रहता है इसलिए इन्हें काल भैरव एवं हाथ में त्रिशूल, तलवार और डंडा होने के कारण इन्हें दंडपाणि भी कहा जाता है।
21 दिसंबर- पौषी दशमी
पौष दशमी के शुभ दिन भगवन पार्श्वनाथ जी का जन्म अश्वसेन जी और माता वामा देवी के घर में हुआ था। भारत सहित दुनिया भर के जैन मंदिरों में पौष दशमी मनाई जाती है। इस दिन मेलों का आयोजन भी किया जाता है।
22 दिसंबर- सफला एकादशी व्रत, उत्तरायण प्रारंभ
पौष माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को सफला एकादशी कहा जाता है। सफला एकादशी व्रत इस वर्ष 22 दिसंबर को है। भगवान विष्णु ने जनकल्याण के लिए अपने शरीर से पुरुषोत्तम मास की एकादशियों सहित कुल 26 एकादशियों को उत्पन्न किया। गीता में भी परमेश्वर श्री कृष्ण ने इस तिथि को अपने ही समान बलशाली बताया है।
उत्तरायण प्रारंभ
उत्तरायण सूर्य की एक दशा है। उत्तरायण के शुरू होने से धीरे- धीरे दिन लंबे और रातें छोटी होने लगती है।