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Vat Savitri vrat 2025: घर के पास नहीं है बरगद का पेड़, तो इस विधि से करें वट सावित्री पूजा

Sat, 17 May 2025 02:57 PM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ज्योति मेहरा Updated Sat, 17 May 2025 02:57 PM IST
सार

वट सावित्री व्रत के दिन महिलाएं विशेष रूप से वट वृक्ष की पूजा की जाती हैं। कई बार घर के आस-पास वट वृक्ष मौजूद नहीं होता है। आइए जानते हैं ऐसे में महिलाएं किस तरह वट सावित्री व्रत की पूजा कर सकती हैं।
 

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Vat Savitri vrat 2025 date know the puja vidhi without banyan tree
वट सावित्री व्रत - फोटो : adobe stock

Vat Savitri Vrat Puja Vidhi In Hindi: सनातन धर्म में व्रत और त्योहारों का विशेष स्थान है, जो पारिवारिक जीवन में भी संतुलन और समृद्धि लाते हैं। इन्हीं विशेष व्रतों में से एक है वट सावित्री व्रत, जिसे विवाहित महिलाएं पूरे श्रद्धा-भाव से अपने पति की लंबी उम्र और दांपत्य जीवन की सुख-शांति के लिए करती हैं।



हिंदू पंचांग के अनुसार, यह व्रत ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। इस बार यह पर्व 26 मई को पड़ रहा है। व्रती महिलाएं इस दिन विशेष रूप से वट वृक्ष (बरगद के पेड़) की पूजा करती हैं, क्योंकि इसे अखंड सौभाग्य और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। लेकिन कई बार घर के आस-पास वट वृक्ष मौजूद नहीं होता है। आइए जानते हैं ऐसे में महिलाएं किस तरह वट सावित्री व्रत की पूजा कर सकती हैं।
 

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वट वृक्ष की पूजा का महत्व - फोटो : freepik

वट वृक्ष की पूजा का महत्व
पौराणिक कथाओं के अनुसार सावित्री ने वट वृक्ष के नीचे बैठकर कठिन तपस्या से अपने पति सत्यवान को यमराज से पुनः जीवनदान दिलवाया था। तभी से इस वृक्ष की पूजा करने की परंपरा चली आ रही है। व्रत तभी पूर्ण माना जाता है जब इस वृक्ष की पूजा विधिपूर्वक की जाए।

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बरगद का पेड़ पास में न हो तो क्या करें? - फोटो : adobe

बरगद का पेड़ पास में न हो तो क्या करें?
आज के समय में खासकर शहरी क्षेत्रों में वट वृक्ष हर जगह आसानी से उपलब्ध नहीं होता। यदि आपके आस-पास बरगद का पेड़ नहीं है, तो आप एक दिन पहले किसी परिचित से बरगद की एक टहनी मंगवा सकती हैं। पूजा के दिन उस टहनी को स्वच्छ स्थान पर स्थापित कर विधिपूर्वक पूजन किया जा सकता है। ऐसा करने से भी व्रत का पूरा फल प्राप्त होता है।

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टहनी भी न मिले तो क्या करें? - फोटो : adobe stock

टहनी भी न मिले तो क्या करें?
यदि किसी कारणवश बरगद की टहनी भी न मिले, तो आप तुलसी के पौधे के समीप बैठकर पूरे विधि-विधान से पूजन कर सकती हैं। पूजा का संकल्प लेकर, व्रत की कथा सुनते हुए और भगवान से अपने संकल्प की पूर्ति की प्रार्थना करते हुए तुलसी माता के समक्ष पूजा करें।

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तुलसी माता की पूजा - फोटो : freepik
 तुलसी माता को भी शुभता और पवित्रता का प्रतीक माना गया है, इसलिए श्रद्धा और आस्था के साथ की गई पूजा निष्फल नहीं जाती।




डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
 
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