फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Spirituality ›   Religion ›   Vat Purnima Vrat June 2020 know vrat katha of Vat purnima

Vat Purnima Vrat June 2020: 5 जून को वट पूर्णिमा व्रत, जानें इस व्रत की पौराणिक कथा

Thu, 04 Jun 2020 11:26 AM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: रुस्तम राणा Updated Thu, 04 Jun 2020 11:26 AM IST
विज्ञापन
Vat Purnima Vrat June 2020 know vrat katha of Vat purnima
वट पूर्णिमा व्रत 2020 - फोटो : अमर उजाला

Vat Purnima vrat 2020: वट पूर्णिमा व्रत 5 जून को पड़ रहा है। यह व्रत हर साल ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। विवाहित महिलाएं इस व्रत को अखंड सौभाग्यवती का आशीर्वाद पाने के लिए रखती हैं। इस दिन वट के वृक्ष की विशेष पूजा होती है। लेकिन मान्यता के अनुसार वट पूर्णिमा व्रत को रखने का पुण्यफल तभी प्राप्त होता है जब इस व्रत की कथा को सुना जाता है। यह पौराणिक कथा इस प्रकार है -  

विज्ञापन

कथानुसार, अश्वपति नाम का एक राजा था। राजा के घर कन्या के रूप में सावित्री का जन्म हुआ। जब वह विवाह योग्य हुई तो राजा ने अपने मंत्री के साथ सावित्री को अपना पति चुनने के लिए भेज दिया। सावित्री ने अपने मन के अनुकूल वर सत्यवान को चुन लिया। सत्यवान महाराज द्युमत्सेन का पुत्र था, जिनका राज्य हर लिया गया है, जो अंधे हो गए हैं और अपनी पत्नी सहित वनों में रहते थे।

विज्ञापन
विज्ञापन

Vat Purnima Vrat June 2020 know vrat katha of Vat purnima
वट पूर्णिमा व्रत 2020 - फोटो : गूगल

वहीं जब सावित्री विवाह करके लौटीं तो नारद जी ने अश्वपति को बधाई दी। साथ ही नारदमुनि ने यह भविष्यवाणी करते हुए कहा कि सत्यवान अल्पायु का है। उसकी जल्द ही मृत्यु हो जाएगी। नारदजी की बात सुनकर राजा अश्वपति का चेहरा मुरझा गया। उन्होंने सावित्री से किसी अन्य को अपना पति चुनने की सलाह दी, परंतु सावित्री ने उत्तर दिया कि आर्य कन्या होने के नाते जब मैं सत्यवान का वरण कर चुकी हूं तो अब वे चाहे अल्पायु हो या दीर्घायु, मैं किसी अन्य को अपने हृदय में स्थान नहीं दे सकती।

विज्ञापन

सावित्री ने नारदजी से सत्यवान की मृत्यु का समय ज्ञात कर लिया। नारदजी द्वारा बताये हुए दिन से तीन दिन पूर्व से ही सावित्री ने उपवास शुरू कर दिया। नारदजी द्वारा निश्चित तिथि को जब सत्यवान लकड़ी काटने जंगल के लिए चला तो सास−ससुर से आज्ञा लेकर वह भी सत्यवान के साथ चल दी। सत्यवान जंगल में पहुंचकर लकड़ी काटने के लिए वृक्ष पर चढ़ा। वृक्ष पर चढ़ने के बाद उसके सिर में भयंकर पीड़ा होने लगी। वह नीचे उतरा। सावित्री ने उसे बरगद के पेड़ के नीचे लिटा कर उसका सिर अपनी जांघ पर रख लिया।

Vat Purnima Vrat June 2020 know vrat katha of Vat purnima
वट पूर्णिमा पूजास 2020 - फोटो : अमर उजाला

देखते ही देखते यमराज ने ब्रह्माजी के विधान की रूपरेखा सावित्री के सामने स्पष्ट की और सत्यवान के प्राणों को लेकर चल दिये। 'कहीं−कहीं ऐसा भी उल्लेख मिलता है कि वट वृक्ष के नीचे लेटे हुए सत्यवान को सर्प ने डंस लिया था।' सावित्री सत्यवान को वट वृक्ष के नीचे ही लिटाकर यमराज के पीछे−पीछे चल दी। पीछे आती हुई सावित्री को यमराज ने उसे लौट जाने का आदेश दिया। इस पर वह बोली महाराज जहां पति वहीं पत्नी। यही धर्म है, यही मर्यादा है।

सावित्री की धर्म निष्ठा से प्रसन्न होकर यमराज बोले कि पति के प्राणों के अतिरिक्त कुछ भी मांग लो। सावित्री ने यमराज से सास−श्वसुर के आंखों की ज्योति और दीर्घायु मांगी। यमराज तथास्तु कहकर आगे बढ़ गए। सावित्री यमराज का पीछा करती रही। यमराज ने अपने पीछे आती सावित्री से वापस लौट जाने को कहा तो सावित्री बोली कि पति के बिना नारी के जीवन की कोई सार्थकता नहीं। यमराज ने सावित्री के पति व्रत धर्म से खुश होकर पुनः वरदान मांगने के लिए कहा। इस बार उसने अपने ससुर का राज्य वापस दिलाने की प्रार्थना की। 

Vat Purnima Vrat June 2020 know vrat katha of Vat purnima
वट पूर्णिमा व्रत कथा - फोटो : social media

तथास्तु कहकर यमराज आगे चल दिये। सावित्री अब भी यमराज के पीछे चलती रही। इस बार सावित्री ने यमराज से सौ पुत्रों की मां बनने का वरदान मांगा। तथास्तु कहकर जब यमराज आगे बढ़े तो सावित्री बोली आपने मुझे सौ पुत्रों का वरदान दिया है, पर पति के बिना मैं मां किस प्रकार बन सकती हूं। अपना यह तीसरा वरदान पूरा कीजिए।

सावित्री की धर्मिनष्ठा, ज्ञान, विवेक तथा पतिव्रत धर्म की बात जानकर यमराज ने सत्यवान के प्राणों को अपने पाश से स्वतंत्र कर दिया। सावित्री सत्यवान के प्राण को लेकर वट वृक्ष के नीचे पहुंची जहां सत्यवान का मृत शरीर रखा था। सावित्री ने वट वृक्ष की परिक्रमा की तो सत्यवान जीवित हो उठा। प्रसन्नचित सावित्री अपने सास−ससुर के पास पहुंची तो उन्हें नेत्र ज्योति प्राप्त हो गई।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed