फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

बैसाखी 2018: जानिए इस दिन कैसे हुई खालसा पंथ की स्थापना

Sat, 14 Apr 2018 09:23 AM IST
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Updated Sat, 14 Apr 2018 09:23 AM IST
विज्ञापन
vaishakhi 2018 on this day birth of sikh khalsa panth

13 अप्रैल 1699 में बैसाखी के पर्व के दिन गुरु गोबिंद सिंह ने खालसा पंथ की स्थापना की थी। आज के दिन ही गुरु गोबिंद सिंह ने सबसे पहले 5 प्यारों को अमृत पान करवाया था। साथ ही पांच प्यारों के हाथों से स्वयं भी अमृत पान किया था।

vaishakhi 2018 on this day birth of sikh khalsa panth

गुरु गोबिंद सिंह का बचपन का नाम गोविन्द राय था। उनका जन्म 1666 में पौष सुदी सप्तमी को पटना शहर में हुआ। उनके जन्म के समय गुरु तेग बहादुर असम में थे। बाद में पंजाब लौटने पर उन्होंने परिवार को पंजाब ही बुला लिया।

vaishakhi 2018 on this day birth of sikh khalsa panth
गुरु तेग बहादुर जिस समय शहीद हुए थे, उस समय गोबिंद सिंह पंद्रह वर्ष के थे। इस घटना ने उन्हें झकझोर दिया। वे इस बात को जानते थे कि लोगों को शासकों के अत्याचारों से मुक्ति दिलाने के लिए सैन्य शक्ति से ज्यादा लोगों का अवसाद दूर करना और उनमें नैतिक बल भरना जरूरी है। 
विज्ञापन
विज्ञापन
vaishakhi 2018 on this day birth of sikh khalsa panth

एक बार गुरु गोबिंद सिंह ने संगत बुलाई और संगत के बीच आकर म्यान से अपनी तलवार निकाली और सभी से सवाल किया कि आप सबमें कोई है जो इस समय मेरे लिए अपना सिर कलम करवाने की क्षमता रखता है। यह सुनते ही संगत में सन्नाटा छा गया लेकिन तभी पहला हाथ भाई दया सिंह जी का उठा। तब गुरु गोबिंद सिंह उन्हें तंबू के पीछे ले गए और थोड़ी देर बाद नंगी तलवार से ताजा खून की बूंदें के साथ वापस लौटें।

विज्ञापन
vaishakhi 2018 on this day birth of sikh khalsa panth

इससे बाद संगत से धर्म सिंह, हिम्मत सिंह, मोहकम सिंह और साहिब सिंह ने अपना सिर कटवाने के लिए गुरु जी के साथ तंबू के पीछे गए।थोड़ी देर के बाद इन्ही पांच लोगों के साथ गुरु जी भी ठीक उसी प्रकार की वेशभूषा में बाहर निकले। यह वही पांच नौजवान थे, जिन्होंने कुछ देर पहले ही गुरु गोबिंद सिंह के कहने पर अपने सिर की कुर्बानी दी थी। इसके बाद सिख धर्म के हर आयोजन की गतिविधियों की देख रेख इन्हीं पंच प्यारों के हाथों में सौंपी गई। सिख धर्म के हर पर्व में गुरु ग्रंथ साहिब की पालकी के आगे इन पंच प्यारों को जगह दी जाती है।
 

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed