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Shradh Paksha 2020: ऐसे शुरू हुई थी श्राद्ध परंपरा, सबसे पहले इन्होंने किया था अपने पितरों का तर्पण

Wed, 02 Sep 2020 06:23 AM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: रुस्तम राणा Updated Wed, 02 Sep 2020 06:23 AM IST
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Shradh Paksha 2020 know the history and significance of Shradh
पितृ पक्ष 2020 - फोटो : सोशल मीडिया

Shradh Paksha 2020: श्राद्ध 2 सितंबर से प्रारंभ हो रहे हैं और ये 17 सितंबर तक चलेंगे। श्राद्ध पक्ष में पितरों के निमित्त तर्पण किया जाता है। उनका आशीर्वाद पाने के लिए दान-पुण्य के कार्य किए जाते हैं। श्राद्ध पक्ष को पितृ पक्ष के नाम से जाना जाता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार, श्राद्ध पर्व भाद्रपद पूर्णिमा से प्रारंभ होकर अश्विन मास की अमावस्या तक चलते हैं। 

Shradh Paksha 2020 know the history and significance of Shradh
श्राद्ध पक्ष 2020 - फोटो : सोशल मीडिया

सनातन परंपरा में श्राद्ध पक्ष का बड़ा महत्व है। लेकिन क्या आपको पता है कि श्राद्ध परंपरा की शुरूआत कैसे हुई। किसने सबसे पहले अपने पितरों का श्राद्ध किया होगा। आइए जानते हैं श्राद्ध परंपरा से जुड़े इतिहास को, जिसका वर्णन पौराणिक कथाओं में मिलता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महाभारत काल में श्राद्ध का वर्णन मिलता है। भीष्म पितामह ने युधिष्ठिर को श्राद्ध के बारे में बताया था। उन्होंने ही यह बताया था कि श्राद्ध परंपरा कैसे शुरू हुई।

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श्राद्ध 2020 - फोटो : सोशल मीडिया

महाभारत के अनुसार, सबसे पहले महान तपस्वी अत्रि ने महर्षि निमि को श्राद्ध के बारे में उपदेश दिया था। तब महर्षि निमि ने उनके उपदेशानुसार अपने पितरों के निमित्त श्राद्ध प्रारंभ किया। इसी प्रकार महर्षि निमि को देखकर अन्य मुनियों ने भी ऐसा करना शुरू किया। श्राद्ध में देवता एवं पितर दोनों ही अपना मान-सम्मान, तरह-तरह के पकवान एवं श्रद्धा भाव देखकर तृप्त हो गए। श्राद्ध में मिल रहे लगातार भोजन से देवताओं और पितरों को अजीर्ण रोग हो गया और उससे उन्हें परेशानी होने लगी। ऐसे में वे अपनी इस समस्या का हल खोजने ब्रह्मा जी की शरण में पहुंच गए। देवताओं और पितरों की समस्या को सुनकर ब्रह्मा जी ने बताया कि अग्निदेव आपकी इस समस्या का समाधान करेंगे। 

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श्राद्ध पक्ष 2020 - फोटो : SELF

अग्निदेव ने देवताओं और पितरों से कहा, "अब श्राद्ध में हम सभी साथ में भोजन किया करेंगे। मेरे पास रहने से आपका अजीर्ण भी दूर हो जाएगा।" यह सुनकर सभी लोग प्रसन्न हुए। इस प्रकार श्राद्ध का भोजन पहले अग्निदेव को चढ़ाया जाता है। उसके बाद देवताओं और पितरों को दिया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, हवन में जो पितरों के लिए पिंडदान दिया जाता है। उसे ब्रह्मराक्षस भी दूषित नहीं करते हैं। इसलिए श्राद्ध में अग्निदेव को देखकर राक्षस भी वहां से चले जाते हैं। अग्नि से प्रत्येक चीज पवित्र हो जाती है। 

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पितृ पक्ष 2020 - फोटो : सोशल मीडिया

पिंड सबसे सबसे पहले पिता को, उसके बाद दादा को और फिर परदादा के लिए किया जाता है। शास्त्रों में यही श्राद्ध की विधि बतायी गई है। जिसके लिए आप पिंडदान कर रहे हैं उस समय एकाग्रचित्त होकर गायत्री मंत्र का जप तथा सोमाय पितृमत्ते स्वाहा मंत्र का जप करना चाहिए। महाभारत के अनुसार, श्राद्ध में तीन पिंडों का विधान है। जिसमें पहले पिंड जल में दिया जाता है। दूसरा पिंड पत्नी एवं गुरूजनों को देना चाहिए और तीसरा पिंड अग्निदेव को समर्पित करना चाहिए। ऐसा करने से मनुष्य की सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। 

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