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Shardiya Navratri 2025: घटस्थापना से लेकर विसर्जन तक, नवरात्रि कैसे सिखाती है अहंकार के त्याग का पाठ

Tue, 23 Sep 2025 06:54 PM IST
शिखर बरनवाल धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिखर बरनवाल Updated Tue, 23 Sep 2025 06:54 PM IST
सार

शारदीय नवरात्रि सिर्फ एक उत्सव नहीं, बल्कि अहंकार के त्याग की एक आध्यात्मिक यात्रा है । आइए इस लेख में इसी के बारे में जानते हैं कि कैसे घटस्थापना से लेकर विसर्जन तक, हर अनुष्ठान हमें समर्पण, इंद्रियों पर नियंत्रण और वैराग्य का पाठ पढ़ाकर अहंकार से मुक्त होना सिखाता है ।
 

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Shardiya Navratri 2025 From Ghatasthapana to visarjan how Navratri teaches the lesson of renunciation of ego
नवरात्रि - फोटो : Adobe Stock

Spiritual Meaning of Navratri Rituals: शारदीय नवरात्रि 22 सितंबर से  शुरू हो चुकी है। शक्ति और साधना का महापर्व शारदीय नवरात्रि पूरे देश में आस्था और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। यह पर्व केवल व्रत-उपवास और उत्सवों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह नौ दिनों की एक गहन आध्यात्मिक यात्रा है जो हमें आत्मशुद्धि और अहंकार के त्याग का पाठ सिखाती है।



नवरात्रि का हर एक अनुष्ठान, पहले दिन की घटस्थापना से लेकर अंतिम दिन के विसर्जन तक, प्रतीकात्मक रूप से हमारे भीतर के 'मैं' को मिटाकर उस परम शक्ति के प्रति समर्पण का भाव जगाने के लिए बनाया गया है। यह त्योहार हमें सिखाता है कि कैसे हम अपने अहंकार, क्रोध और इच्छाओं को त्याग कर देवी की कृपा के पात्र बन सकते हैं और एक संतुलित जीवन जी सकते हैं।

Shardiya Navratri 2025 From Ghatasthapana to visarjan how Navratri teaches the lesson of renunciation of ego
कलश - फोटो : Adobe Stock
घटस्थापना
नवरात्रि का आरंभ घटस्थापना से होता है, जो अहंकार के त्याग का पहला कदम है। जब हम एक मिट्टी के कलश में पवित्र जल भरकर देवी का आह्वान करते हैं, तो हम स्वीकार करते हैं कि हमारा शरीर और घर केवल उस दिव्य ऊर्जा का पात्र है। हम अपने 'मैं' और 'मेरे' के भाव को त्यागकर देवी को अपने जीवन का केंद्र बनाते हैं और खुद को केवल एक माध्यम समझते हैं।

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Shardiya Navratri 2025 From Ghatasthapana to visarjan how Navratri teaches the lesson of renunciation of ego
नवरात्रि व्रत 2025 - फोटो : Freepik
व्रत इंद्रियों पर विजय का प्रतीक है
नौ दिनों का व्रत केवल भोजन का त्याग नहीं, बल्कि यह अहंकार के सबसे बड़े औजार हैं, यानी हमारी इंद्रियों पर नियंत्रण की साधना है। सात्विक भोजन और अनुशासित जीवनशैली अपनाकर हम अपनी इच्छाओं और वासनाओं को नियंत्रित करते हैं। जब हम देवी के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करते हैं, तो हम अपनी सीमाओं को स्वीकार करते हैं और उनकी अनंत शक्ति के सामने नतमस्तक होते हैं, जिससे हमारा अहंकार स्वतः ही कम हो जाता है।

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Shardiya Navratri 2025 From Ghatasthapana to visarjan how Navratri teaches the lesson of renunciation of ego
कन्या पूजान - फोटो : Adobe Stock
कन्या पूजन पवित्रता के आगे नमन का उदाहरण है
नवरात्रि में कन्या पूजन अहंकार को पूरी तरह से विसर्जित करने का सबसे सुंदर घटना है। इस परंपरा में हम छोटी-छोटी कन्याओं में देवी का साक्षात स्वरूप देखकर उनके चरण धोते हैं और उन्हें भोजन कराकर उनका आशीर्वाद लेते हैं। एक ज्ञानी और अनुभवी व्यक्ति का छोटी बालिकाओं के आगे झुकना, अहंकार के पूर्ण विनाश और पवित्रता की सर्वोच्च सत्ता को स्वीकार करने का प्रतीक है।

 
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Shardiya Navratri 2025 From Ghatasthapana to visarjan how Navratri teaches the lesson of renunciation of ego
मां दुर्गा की भव्य प्रतिमा विसर्जन - फोटो : Amar Ujala
विसर्जन वैराग्य का अंतिम पाठ है
नौ दिनों तक जिस मूर्ति की हमने पूरी श्रद्धा से पूजा की, उसे अंतिम दिन जल में विसर्जित कर देना वैराग्य और अनासक्ति का सबसे बड़ा पाठ है। अहंकार हर सुंदर वस्तु और अनुभव को हमेशा के लिए अपना बनाना चाहता है। लेकिन विसर्जन हमें सिखाता है कि इस संसार में हर स्वरूप नश्वर है और उसे अंत में उसी निराकार ब्रह्म में विलीन हो जाना है। यह हमें फल की चिंता किए बिना कर्म करने की प्रेरणा देता है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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