गणेश उत्सव की समाप्ति का समय भक्तों के लिए भावुक और श्रद्धा से भरा होता है। कई दिनों तक घर और पंडाल में विराजमान रहने के बाद भगवान गणेश की प्रतिमा का विधि-विधान से विसर्जन किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विसर्जन भगवान गणेश के अपने धाम यानी कैलाश पर्वत लौटने का प्रतीक माना जाता है। भक्त उन्हें अगले वर्ष फिर से आने का निमंत्रण देते हुए श्रद्धा और भावनाओं के साथ विदाई देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि गणपति विसर्जन के बाद की एक परंपरा भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है? विसर्जन स्थल से घर लौटने के बाद परिवार के सदस्य सबसे पहले आरती करते हैं। कई घरों में इस परंपरा का विशेष रूप से पालन किया जाता है और इसे गणेश उत्सव की पूर्णता से जोड़कर देखा जाता है। आखिर विसर्जन के बाद घर लौटते ही आरती करने की परंपरा क्यों है? इसके पीछे कौन-सी धार्मिक मान्यताएं और आध्यात्मिक भावनाएं जुड़ी हैं? आइए जानते हैं गणेश विसर्जन के बाद घर लौटते ही आरती क्यों की जाती है, इस परंपरा का धार्मिक महत्व क्या है और इसके पीछे कौन-कौन सी मान्यताएं प्रचलित हैं।
गणपति विसर्जन के बाद घर लौटते ही क्यों होती है आरती, जानिए इसके पीछे की धार्मिक मान्यता
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: श्वेता सिंह
Updated Wed, 23 Sep 2026 12:31 PM IST
सार
गणेश उत्सव के समापन के साथ ही गणपति बप्पा को भावभीनी विदाई देने की परंपरा निभाई जाती है, जिसे गणपति विसर्जन कहा जाता है। लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि विसर्जन के बाद जब लोग घर लौटते हैं, तो सबसे पहला काम आरती करना ही क्यों होता है? यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और इसके पीछे एक गहरी धार्मिक मान्यता जुड़ी हुई है। आइए जानते हैं आखिर विसर्जन के बाद घर में आरती करने की यह परंपरा क्यों निभाई जाती है और इसका क्या महत्व है।
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