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एकादशी 2026: आज परिवर्तिनी एकादशी पर बना शुभ योग, जानिए पूजाविधि, महत्व और शुभमुहूर्त

Tue, 22 Sep 2026 04:49 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Tue, 22 Sep 2026 04:49 AM IST
सार

परिवर्तिनी एकादशी पर भगवान विष्णु क्षीर सागर में विश्राम करते हुए करवट बदलते हैं जिसके कारण इसे परिवर्तिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। 

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parvartini ekadashi 2026 kab hai parvartini ekadashi shubh muhurat puja vidhi mantra
परिवर्तिनी एकादशी पूजा शुभ मुहूर्त - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आज परिवर्तिनी एकादशी है। हिंदू धर्म में एकादशी के व्रत और पूजा का विशेष महत्व होता है। हर माह दो एकादशी का व्रत रखा जाता है, जो एक शुक्ल पक्ष में पड़ती है जबकि दूसरा कृष्ण पक्ष में। भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी, पद्मा एकादशी या जलझूलनी एकादशी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब चार महीनों के दौरान भगवान विष्णु क्षीर सागर में सोते हैं और इस तिथि पर जब वह करवट बदलते हैं तो इसे परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है। इस एकादशी का व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं इस परिवर्तिनी एकादशी का महत्व और पूजा शुभ मुहूर्त। 

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परिवर्तिनी एकादशी 2026 तिथि
हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 21 सितंबर को रात 8 बजे शुरू होकर 22 सितंबर को रात 9 बजकर 42 मिनट तक रहेगी। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार, परिवर्तिनी एकादशी का व्रत 22 सितंबर को है। 
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परिवर्तिनी एकादशी शुभ मुहूर्त और योग 2026
आज  22 सितंबर परिवर्तिनी एकादशी के दिन रवि योग का संयोग बन रहा है। सुबह 6 बजकर 9 मिनट से रवियोग प्रारंभ हो चुका है जो सुबह 7 बजकर 7 मिनट तक रहेगा। इस योग को शुभ माना जाता है। वहीं पूजा के लिए मुहूर्त इस प्रकार है।
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लाभ-उन्नति मुहूर्त- सुबह 10 बजकर 43 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 14 मिनट 
अमृत- सर्वोत्तम मुहूर्त- दोपहर 12 बजकर 14 मिनट से लेकर 01 बजकर 45 मिनट तक।
अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11 बजकर 49 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 38 मिनट तक। 

परिवर्तिनी एकादशी पूजा विधि 
- इस एकादशी पर सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे कपड़े पहनें।
- फिर पूजा स्थल की साफ-सफाई करके भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की तस्वीर को स्थापित करें। 
- इसके बाद पूजा का संकल्प लेते हुए भगवान विष्णु को पीला फूल, चंदन, पील वस्त्र, तुलसी दल, फल और मिठाई अर्पित करें। 
- फिर धूप और दीपक जलाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधि-विधान के साथ पूजा करें।
- पूजा के दौरान ऊं नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करना बहुत ही शुभ माना जाता है। 
- इसके बाद कथा सुने और आरती करें।  

परिवर्तिनी एकादशी पर मंत्र जाप 
ॐ विष्णवे नमः
ॐ वासुदेवाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णु: प्रचोदयात्
ॐ लक्ष्मीपतये नमः

भगवान विष्णु की आरती

ॐ जय जगदीश हरे, 
स्वामी ! जय जगदीश हरे।
ॐ जय जगदीश हरे।

जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का।

स्वामी दुःख विनसे मन का।

सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥

ॐ जय जगदीश हरे।

मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ मैं किसकी।

स्वामी शरण गहूँ मैं किसकी।

तुम बिन और न दूजा, आस करूँ जिसकी॥

ॐ जय जगदीश हरे।

तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।

स्वामी तुम अन्तर्यामी।

पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥

ॐ जय जगदीश हरे।

तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता।

स्वामी तुम पालन-कर्ता।

मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥

ॐ जय जगदीश हरे।

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।

स्वामी सबके प्राणपति।

किस विधि मिलूँ दयामय, तुमको मैं कुमति॥

ॐ जय जगदीश हरे।

दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।

स्वामी तुम ठाकुर मेरे।

अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥

ॐ जय जगदीश हरे।

विषय-विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।

स्वमी पाप हरो देवा।

श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, सन्तन की सेवा॥

ॐ जय जगदीश हरे।

श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे।

स्वामी जो कोई नर गावे।

कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥

ॐ जय जगदीश हरे।

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