Shiv Ji Ki Puja: श्रावण मास भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। इस साल यह पावन महीना 11 जुलाई से प्रारंभ हो चुका है और यग 9 अगस्त तक चलेगा। इस अवधि में भक्तगण हर दिन शिवजी की विधिपूर्वक पूजा करते हैं। जलाभिषेक, मंत्र जाप, व्रत और विविध प्रकार के फल-फूलों से शिव की आराधना की जाती है। माना जाता है कि भगवान शिव जल्दि प्रसन्न हो जाते हैं। यदि सच्चे मन से केवल जल अर्पित किया जाए, तो भोलेनाथ वह भी स्वीकार कर लेते हैं। शिव जी को सामान्य प्रसाद प्रिय है, लेकिन कुछ फल ऐसे भी हैं, जिन्हें उनकी पूजा में अर्पित नहीं करना वर्जित माना जाता है। आइए जानते हैं कि ये फल कौन से हैं...
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Shiv Ji Ki Puja: शिवलिंग पर नहीं चढ़ाए जाते ये पांच फल, नाराज हो सकते हैं भोलेनाथ
Sun, 20 Jul 2025 06:47 AM IST
ज्योति मेहरा
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: ज्योति मेहरा
Updated Sun, 20 Jul 2025 06:47 AM IST
सार
माना जाता है कि भगवान शिव जल्दि प्रसन्न हो जाते हैं। यदि सच्चे मन से केवल जल अर्पित किया जाए, तो भोलेनाथ वह भी स्वीकार कर लेते हैं। शिव जी को सामान्य प्रसाद प्रिय है, लेकिन कुछ फल ऐसे भी हैं, जिन्हें उनकी पूजा में अर्पित नहीं करना वर्जित माना जाता है।
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सावन माह में शिव आराधना
- फोटो : adobe
शिवलिंग पर नहीं चढ़ाए जाते ये पांच फल
- फोटो : adobe stock
नारियल
नारियल समुद्र मंथन की प्रक्रिया से उत्पन्न हुआ था और इसे मां लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। चूंकि लक्ष्मी जी भगवान विष्णु की अर्धांगिनी हैं, इसलिए नारियल चढ़ाना शिव को लक्ष्मी अर्पित करने जैसा माना जाता है, जो पूजा शास्त्रों के अनुसार अनुचित है।
नारियल समुद्र मंथन की प्रक्रिया से उत्पन्न हुआ था और इसे मां लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। चूंकि लक्ष्मी जी भगवान विष्णु की अर्धांगिनी हैं, इसलिए नारियल चढ़ाना शिव को लक्ष्मी अर्पित करने जैसा माना जाता है, जो पूजा शास्त्रों के अनुसार अनुचित है।
केला
- फोटो : Freepik.com
केला
पुराणों में वर्णन मिलता है कि केले के वृक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव के रौद्र रूप और ब्राह्मण के शाप के कारण हुई थी। यही कारण है कि केले को शिवजी को अर्पित नहीं किया जाता।
पुराणों में वर्णन मिलता है कि केले के वृक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव के रौद्र रूप और ब्राह्मण के शाप के कारण हुई थी। यही कारण है कि केले को शिवजी को अर्पित नहीं किया जाता।
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अनार
- फोटो : freepik.com
अनार
शिवलिंग पर संपूर्ण अनार चढ़ाना वर्जित है। हालांकि श्रद्धापूर्वक अनार के रस से अभिषेक करना स्वीकार्य माना गया है।
जामुन
धार्मिक दृष्टिकोण से जामुन को पूरी तरह से शुद्ध नहीं माना गया है। इसी वजह से इसे शिवलिंग या शिव प्रतिमा पर नहीं चढ़ाया जाता और न ही इसे प्रसाद के रूप में अर्पित किया जाता है।
शिवलिंग पर संपूर्ण अनार चढ़ाना वर्जित है। हालांकि श्रद्धापूर्वक अनार के रस से अभिषेक करना स्वीकार्य माना गया है।
जामुन
धार्मिक दृष्टिकोण से जामुन को पूरी तरह से शुद्ध नहीं माना गया है। इसी वजह से इसे शिवलिंग या शिव प्रतिमा पर नहीं चढ़ाया जाता और न ही इसे प्रसाद के रूप में अर्पित किया जाता है।
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इन चीजों से भी करें परहेज
- फोटो : adobe stock
इन चीजों से भी करें परहेज
इन फलों के अलावा तुलसी के पत्ते और केवड़ा फूल भी भगवान शिव को नहीं चढ़ाए जाते। शिवपुराण के अनुसार केवड़ा फूल को शिव ने श्रापित किया था क्योंकि इसने ब्रह्मा जी के असत्य कथन का समर्थन किया था। साथ ही, शिव वैराग्य और तप के प्रतीक हैं, इसलिए उन्हें कुमकुम, सिंदूर या स्त्रियों के श्रृंगार संबंधी वस्तुएं भी नहीं अर्पित करनी चाहिए। ऐसी वस्तुएं शिव पूजा के प्रभाव को कम कर सकती हैं।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
इन फलों के अलावा तुलसी के पत्ते और केवड़ा फूल भी भगवान शिव को नहीं चढ़ाए जाते। शिवपुराण के अनुसार केवड़ा फूल को शिव ने श्रापित किया था क्योंकि इसने ब्रह्मा जी के असत्य कथन का समर्थन किया था। साथ ही, शिव वैराग्य और तप के प्रतीक हैं, इसलिए उन्हें कुमकुम, सिंदूर या स्त्रियों के श्रृंगार संबंधी वस्तुएं भी नहीं अर्पित करनी चाहिए। ऐसी वस्तुएं शिव पूजा के प्रभाव को कम कर सकती हैं।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।