Temples Famous For Their Non Vegetarian Prasad: हिंदू धर्म में आस्था रखने वाले अधिकांश लोग मांस-मदिरा के सेवन से दूर रहते हैं। यही कारण है कि जब किसी मंदिर में प्रसाद अर्पित किया जाता है, तो उसकी पवित्रता और शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है। हालांकि भारत एक विविधताओं से भरा देश है, जहां हर कुछ किलोमीटर पर भाषा, रहन-सहन, खान-पान और धार्मिक परंपराएं बदल जाती हैं। यही विविधता पूजा-पद्धति और आस्थाओं में भी देखने को मिलती है। चौंकाने वाली बात यह है कि भारत में कुछ ऐसे भी मंदिर हैं, जहां मांसाहार को न केवल स्वीकार किया जाता है, बल्कि भगवान को मांस, मछली, यहां तक कि चिकन और मटन का भोग भी लगाया जाता है। श्रद्धालु इसे प्रसाद के रूप में भी ग्रहण करते हैं। आइए जानते हैं इन मंदिरों के बारे में...
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Famous Temples: भारत के ऐसे मंदिर जहां प्रसाद के रूप में चढ़ता है मांस और मदिरा
Wed, 16 Jul 2025 04:19 PM IST
ज्योति मेहरा
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: ज्योति मेहरा
Updated Wed, 16 Jul 2025 04:19 PM IST
सार
भारत में कुछ ऐसे भी मंदिर हैं, जहां मांसाहार को न केवल स्वीकार किया जाता है, बल्कि भगवान को मांस, मछली, यहां तक कि चिकन और मटन का भोग भी लगाया जाता है। श्रद्धालु इसे प्रसाद के रूप में भी ग्रहण करते हैं। आइए जानते हैं इन मंदिरों के बारे में...
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Temples Famous For Their Non Vegetarian Prasad
- फोटो : अमर उजाला
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कामाख्या देवी मंदिर
- फोटो : adobe stock
1. कामाख्या देवी मंदिर (असम)
यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है और तंत्र साधना का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यहां मां को प्रसन्न करने के लिए भक्त मांस और मछली अर्पित करते हैं, जो बाद में प्रसाद के रूप में बांटा जाता है।
2. कालीघाट मंदिर (कोलकाता)
इस प्राचीन मंदिर में काली माता को बकरे की बलि दी जाती है। पूजा के बाद यही मांस प्रसाद के रूप में भक्तों को वितरित होता है।
यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है और तंत्र साधना का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यहां मां को प्रसन्न करने के लिए भक्त मांस और मछली अर्पित करते हैं, जो बाद में प्रसाद के रूप में बांटा जाता है।
2. कालीघाट मंदिर (कोलकाता)
इस प्राचीन मंदिर में काली माता को बकरे की बलि दी जाती है। पूजा के बाद यही मांस प्रसाद के रूप में भक्तों को वितरित होता है।
मंदिर
- फोटो : adobe stock
3. मुनियांदी स्वामी मंदिर (तमिलनाडु)
मदुरई स्थित इस मंदिर में भगवान मुनियांदी को चिकन और मटन बिरयानी का भोग लगाया जाता है, जिसे बाद में भक्तों में प्रसाद के रूप में बांटा जाता है।
4. तरकुलहा देवी मंदिर (गोरखपुर, उत्तर प्रदेश)
यहां भक्त मनोकामना पूर्ण होने पर बकरे की बलि देते हैं। बलि के बाद मांस को मंदिर परिसर में पकाया जाता है और प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है।
मदुरई स्थित इस मंदिर में भगवान मुनियांदी को चिकन और मटन बिरयानी का भोग लगाया जाता है, जिसे बाद में भक्तों में प्रसाद के रूप में बांटा जाता है।
4. तरकुलहा देवी मंदिर (गोरखपुर, उत्तर प्रदेश)
यहां भक्त मनोकामना पूर्ण होने पर बकरे की बलि देते हैं। बलि के बाद मांस को मंदिर परिसर में पकाया जाता है और प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है।
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काल भैरव
- फोटो : adobe stock
5. काल भैरव मंदिर
काल भैरव मंदिर में सबसे अनोखा और चर्चित प्रसाद चढ़ता है। वाराणसी और उज्जैन जैसे प्रमुख काल भैरव मंदिरों में भक्त शराब की बोतल लेकर भगवान को चढ़ाते हैं। मान्यता है कि काल भैरव को शराब चढ़ाने से वे शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्त की हर बाधा हरते हैं।
काल भैरव मंदिर में सबसे अनोखा और चर्चित प्रसाद चढ़ता है। वाराणसी और उज्जैन जैसे प्रमुख काल भैरव मंदिरों में भक्त शराब की बोतल लेकर भगवान को चढ़ाते हैं। मान्यता है कि काल भैरव को शराब चढ़ाने से वे शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्त की हर बाधा हरते हैं।
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दक्षिणेश्वर काली मंदिर
- फोटो : adobe stock
6. दक्षिणेश्वर काली मंदिर (कोलकाता)
यहां काली माता को भोग के रूप में मछली अर्पित की जाती है, जिसे बाद में भक्त प्रसाद स्वरूप स्वीकार करते हैं।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
यहां काली माता को भोग के रूप में मछली अर्पित की जाती है, जिसे बाद में भक्त प्रसाद स्वरूप स्वीकार करते हैं।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।