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पितृ पक्ष 2026: पितृ दोष से जुड़ी परेशानियां हैं तो पितृ पक्ष में करें ये उपाय, जानें धार्मिक मान्यता

Tue, 06 Oct 2026 12:18 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: श्वेता सिंह Updated Tue, 06 Oct 2026 12:18 AM IST
सार

पितृ पक्ष को पितरों के प्रति श्रद्धा और तर्पण के लिए विशेष समय माना जाता है। ज्योतिष में कुंडली में पितृ दोष को जीवन में आने वाली कुछ परेशानियों से जोड़कर देखा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, पितृ पक्ष के दौरान कुछ विशेष उपाय करने से पितरों की शांति और पितृ दोष से जुड़ी समस्याओं में राहत मिल सकती है।

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Pitru Paksha 2026 Know Remedies for Pitru Dosha and the Religious Beliefs Behind Them
पितृ दोष से मुक्ति के उपाय - फोटो : अमर उजाला

पितृ पक्ष को पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने, तर्पण और श्राद्ध करने का विशेष समय माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, जन्म कुंडली में सूर्य का राहु या केतु के साथ विशेष संबंध बनने पर पितृ दोष की स्थिति मानी जा सकती है। इसे पितृ ऋण से जोड़कर देखा जाता है। धार्मिक मान्यता में पितृ दोष को विवाह, संतान, करियर, आर्थिक स्थिति और पारिवारिक जीवन से जुड़ी परेशानियों से जोड़ा जाता है। हालांकि, ये ज्योतिषीय और धार्मिक मान्यताएं हैं, वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित कारण नहीं हैं। पितृ पक्ष के दौरान तर्पण, श्राद्ध, दान और पितरों का स्मरण करने की परंपरा है। आइए जानते हैं पितृ दोष से जुड़े कौन-कौन से उपाय किए जाते हैं।

Pitru Paksha 2026 Know Remedies for Pitru Dosha and the Religious Beliefs Behind Them
क्या होता है पितृ दोष? - फोटो : adobe stock

क्या होता है पितृ दोष? 
ज्योतिष शास्त्र की मान्यता के अनुसार, कुंडली में सूर्य का राहु या केतु के साथ कुछ विशेष भावों या स्थितियों में संबंध बनने पर पितृ दोष माना जाता है। इसे पितरों से जुड़े कर्मों और पितृ ऋण की अवधारणा से जोड़ा जाता है। हालांकि, केवल किसी एक ग्रह स्थिति के आधार पर पितृ दोष का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं माना जाता। इसकी व्याख्या के लिए पूरी कुंडली और अन्य ग्रह स्थितियों को देखा जाता है।

Pitru Paksha 2026 Know Remedies for Pitru Dosha and the Religious Beliefs Behind Them
पितृ दोष से किन परेशानियों को जोड़ा जाता है? - फोटो : adobe stock

पितृ दोष से किन परेशानियों को जोड़ा जाता है?
ज्योतिषीय मान्यताओं में पितृ दोष को जीवन में आने वाली कुछ रुकावटों से जोड़कर देखा जाता है। इनमें विवाह में देरी, संतान से संबंधित चिंता, नौकरी या कारोबार में बार-बार अड़चन और आर्थिक अस्थिरता जैसी स्थितियां शामिल हैं। कई धार्मिक मान्यताओं में परिवार में लगातार तनाव या किसी काम के बार-बार अटकने को भी पितृ दोष से जोड़ा जाता है। लेकिन जीवन में ऐसी परिस्थितियों के कई व्यावहारिक कारण भी हो सकते हैं।

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पितृ दोष से जुड़े धार्मिक उपाय - फोटो : AI

पितृ दोष से जुड़े धार्मिक उपाय

  • पितृ पक्ष में तर्पण करने की विशेष परंपरा है। श्रद्धालु तिल और जल अर्पित करके अपने पितरों का स्मरण करते हैं और उनकी शांति के लिए प्रार्थना करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्रद्धा के साथ किया गया तर्पण पितरों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का माध्यम है।
  • पितृ पक्ष के दौरान जिस तिथि को किसी पितर का निधन हुआ हो, उसी तिथि पर श्राद्ध करने की परंपरा है। इस अवसर पर तर्पण, पिंडदान और ब्राह्मण भोजन सहित परिवार की परंपरा के अनुसार अन्य धार्मिक कर्म किए जाते हैं। अगर किसी पितर की मृत्यु तिथि ज्ञात न हो या किसी कारण से उस तिथि पर श्राद्ध न हो पाया हो, तो सर्वपितृ अमावस्या को श्राद्ध करने की परंपरा है।
  • सर्वपितृ अमावस्या को पितृ पक्ष का समापन माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह दिन उन पितरों के लिए श्राद्ध और तर्पण करने के लिए महत्वपूर्ण है, जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं है। 2026 में सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्तूबर को होगी। इस दिन परिवार की परंपरा और सामर्थ्य के अनुसार श्राद्ध, तर्पण और दान-पुण्य किया जा सकता है।
  • पितृ पक्ष की परंपराओं में गाय, कौवे और कुत्तों को भोजन कराने का भी उल्लेख मिलता है। कई परिवार श्राद्ध कर्म के दौरान इन्हें भोजन अर्पित करते हैं। धार्मिक मान्यता में इसे पितरों के प्रति श्रद्धा और सेवा भाव से जोड़कर देखा जाता है।
  • हिंदू धर्म में पीपल के पेड़ को पवित्र माना जाता है। पितृ दोष से जुड़े धार्मिक उपायों में पीपल की पूजा और उसके नीचे दीपक जलाने की भी मान्यता है। पितृ पक्ष के दौरान श्रद्धालु पीपल के पेड़ के पास जल अर्पित करते हैं और पितरों की शांति के लिए प्रार्थना करते हैं। ऐसा करते समय स्थानीय और पारिवारिक धार्मिक परंपराओं का पालन करना उचित माना जाता है।
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पितृ पक्ष में दान-पुण्य का महत्व - फोटो : AI

पितृ पक्ष में दान-पुण्य का महत्व
पितृ पक्ष के दौरान जरूरतमंदों को भोजन कराने और सामर्थ्य के अनुसार वस्त्र, अनाज या अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, दान-पुण्य और सेवा कार्य पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का एक माध्यम हैं। इसलिए पितृ पक्ष में केवल कर्मकांड पर ध्यान देने के बजाय जरूरतमंद व्यक्ति की मदद करना और परिवार के दिवंगत सदस्यों को श्रद्धापूर्वक याद करना भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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