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Pitru Paksha 2023: आज से शुरू हो रहे हैं पितृपक्ष, जानें तर्पण की सही विधि और प्रार्थना मंत्र

Fri, 29 Sep 2023 09:11 AM IST
आशिकी पटेल धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: आशिकी पटेल Updated Fri, 29 Sep 2023 09:11 AM IST
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Pitru Paksha 2023 Start Date Tarpan Vidhi Mantra Pind Daan Puja Samagari And Shradh Niyam In Hindi
Pitru Paksha 2023: जानें तर्पण की सही विधि और प्रार्थना मंत्र - फोटो : अमर उजाला

Pitru Paksha 2023: आज  यानी 29 सितंबर से पितृपक्ष की शुरुआत हो रही है। 14 अक्तूबर को इसका समापन होगा। पंचांग के अनुसार भाद्रपद माह की पूर्णिमा तिथि से लेकर अश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि तक पितृपक्ष चलते हैं। पितृपक्ष श्राद्ध और पिंडदान के महत्वपूर्ण माने जाते हैं। पितृपक्ष के दौरान पूर्वजों को श्रद्धापूर्वक याद करके उनका श्राद्ध कर्म किया जाता है। श्राद्ध न केवल पितरों की आत्मा की शांति के लिए किया जाता है, बल्कि उनके प्रति अपना सम्मान प्रकट करने के लिए भी किया जाता है। मान्यता है कि पितृपक्ष में पितरों का श्राद्ध करने से उनकी कृपा प्राप्त होती है और हर प्रकार की बाधाओं से मुक्ति मिलती है। पितृपक्ष में श्रद्धा पूर्वक अपने पूर्वजों को जल देने का विधान है। ऐसे में चलिए जानते हैं तर्पण विधि और मंत्र के बारे में...  



Pitru Paksha 2023: कल से हो रही है पितृपक्ष की शुरुआत, जानें तर्पण विधि और श्राद्ध पक्ष की तिथियां

Pitru Paksha 2023 Start Date Tarpan Vidhi Mantra Pind Daan Puja Samagari And Shradh Niyam In Hindi
Pitru Paksha 2023: जानें तर्पण की सही विधि और प्रार्थना मंत्र - फोटो : अमर उजाला
तर्पण विधि
  • पितृपक्ष में रोजाना नियमित रूप से पितरों के लिए तर्पण करना चाहिए। 
  • तर्पण के लिए आपको कुश, अक्षत्, जौ और काला तिल का उपयोग करना चाहिए। 
  • तर्पण करने के बाद पितरों से प्रार्थना करनी चाहिए, ताकि वे संतुष्ट हों और आपको आशीर्वाद दें। 
  • तर्पण के लिए सबसे पहले आप पूर्व दिशा में मुख करके कुश लेकर देवताओं के लिए अक्षत से तर्पण करें। 
  • इसके बाद जौ और कुश लेकर ऋषियों के लिए तर्पण करें। 
  • फिर उत्तर दिशा में अपना मुख करके जौ और कुश से मानव तर्पण करें। 
  • आखिर में दक्षिण दिशा में मुख कर लें और काले तिल व कुश से पितरों का तर्पण करें। 
  • तर्पण करने के बाद पितरों से प्रार्थना करें और गलतियों के लिए क्षमा मांगे।
Pitru Paksha 2023 Start Date Tarpan Vidhi Mantra Pind Daan Puja Samagari And Shradh Niyam In Hindi
Pitru Paksha 2023: जानें तर्पण की सही विधि और प्रार्थना मंत्र - फोटो : अमर उजाला
पितर प्रार्थना मंत्र

1. पितृभ्य:स्वधायिभ्य:स्वधा नम:।
पितामहेभ्य:स्वधायिभ्य:स्वधा नम:।
प्रपितामहेभ्य:स्वधायिभ्य:स्वधा नम:।
सर्व पितृभ्यो श्र्द्ध्या नमो नम:।।

2. ॐ नमो व :पितरो रसाय नमो व:
पितर: शोषाय नमो व:
पितरो जीवाय नमो व:
पीतर: स्वधायै नमो व:
पितर: पितरो नमो वो
गृहान्न: पितरो दत्त:सत्तो व:।।

Pitru Paksha 2023: पितृपक्ष में क्या करें और क्या नहीं? जानें सभी जरूरी नियम

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Pitru Paksha 2023 Start Date Tarpan Vidhi Mantra Pind Daan Puja Samagari And Shradh Niyam In Hindi
Pitru Paksha 2023: जानें तर्पण की सही विधि और प्रार्थना मंत्र - फोटो : अमर उजाला
पितृपक्ष का महत्व 

हिंदू धर्म में मान्यता है कि पूर्वजों की तीन पीढ़ियों की आत्माएं पितृलोक में निवास करती हैं। पितृलोक स्वर्ग और पृथ्वी के बीच का स्थान माना जाता है। यह क्षेत्र मृत्यु के देवता यम द्वारा शासित है। मान्यता है कि जब अगली पीढ़ी का व्यक्ति मर जाता है, तो पहली पीढ़ी स्वर्ग में जाती है और भगवान के साथ मिल जाती है। इस प्रकार पितृलोक में केवल तीन पीढ़ियों को श्राद्ध संस्कार दिया जाता है, जिसमें यम की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

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Pitru Paksha 2023: जानें तर्पण की सही विधि और प्रार्थना मंत्र - फोटो : अमर उजाला
श्राद्ध से जुड़ी पौराणिक कथा 

पौराणिक मान्यता के अनुसार जब महाभारत युद्ध के दौरान कर्ण की मृत्यु हुई, तो उसकी आत्मा स्वर्ग चली गई, जहां उसे भोजन के रूप में सोना और रत्न चढ़ाए गए। हालांकि कर्ण को खाने के लिए वास्तविक भोजन की आवश्यकता थी और स्वर्ग के स्वामी इंद्र से भोजन के रूप में सोने परोसने का कारण पूछा। इंद्र ने कर्ण से कहा कि उसने जीवन भर सोना दान किया था, लेकिन श्राद्ध में अपने पूर्वजों को कभी भोजन नहीं दिया था। कर्ण ने कहा कि चूंकि वह अपने पूर्वजों से अनभिज्ञ था, इसलिए उसने कभी भी उसकी याद में कुछ भी दान नहीं किया। इसके बाद कर्ण को 15 दिनों की अवधि के लिए पृथ्वी पर लौटने की अनुमति दी गई, ताकि वह श्राद्ध कर सके और उनकी स्मृति में भोजन और पानी का दान कर सके। इस काल को अब पितृपक्ष के नाम से जाना जाता है। 

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