Janmashtami Cake Cutting: हिंदू धर्म में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी एक अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है, जिसे भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष यह पावन पर्व 16 अगस्त को मनाया जाएगा। भक्त इस दिन भगवान श्रीकृष्ण का सोलह श्रृंगार करते हैं, उन्हें सुंदर वस्त्र, आभूषण और फूलों से सजाते हैं तथा विशेष पूजन और भोग अर्पित करते हैं। आज कल कई लोग इस दिन केक काटकर भी श्रीकृष्ण का जन्मदिन मनाते हैं। लेकिन अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या यह परंपरागत दृष्टि से उचित है? इस विषय पर संत प्रेमानंद जी महाराज ने अपना स्पष्ट मत देते हुए मार्गदर्शन किया है। आइए जानते हैं प्रेमानंद जी महाराज ने इस पर क्या कहा...
Janmashtami 2025: कृष्ण जन्माष्टमी पर केक काटना सही या गलत, जानें प्रेमानंद जी महाराज ने क्या कहा?
अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या जन्माष्टमी पर केक काटकर श्रीकृष्ण का जन्मदिन मनाना परंपरागत दृष्टि से उचित है? इस विषय पर संत प्रेमानंद जी महाराज ने अपना स्पष्ट मत देते हुए मार्गदर्शन किया है। आइए जानते हैं प्रेमानंद जी महाराज ने इस पर क्या कहा...
जन्माष्टमी पर केक काटना सही है या नहीं?
वृंदावन धाम में अपने प्रवचनों से भक्तों को प्रेरित करने वाले प्रेमानंद महाराज सोशल मीडिया पर भी लोगों को मार्गदर्शित करते हैं। हाल ही में सोशल मीडिया पर उनकी एक वीडियो काफी वायरल हो रही है, जिसमें एक भक्त ने यही सवाल पूछा, कि जन्माष्टमी पर केक काटकर ठाकुर जी का जन्मदिन मनाना सही है या नहीं?
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प्रेमानंद महाराज का दृष्टिकोण
प्रेमानंद जी महाराज ने इस सलाल पर कहा कि अधिकतर बेकरी में अंडा युक्त और अंडा रहित दोनों तरह के केक बनते हैं। ऐसे में शुद्धता की गारंटी नहीं होती। ऐसे केक का पूजा में इस्तेमाल उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि जो लोग धार्मिक विधि-विधान से अनजान होते हैं, वे अपनी सुविधा अनुसार तरीकों का चयन कर लेते हैं। लेकिन भोग में ऐसे किसी भी पदार्थ का उपयोग नहीं करना चाहिए जो अभक्ष्य (धर्मशास्त्रों के अनुसार वर्जित) हो।
यहां देखें वीडियो
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सात्विक भोग
प्रेमानंद महाराज बताते हैं कि जन्माष्टमी पर भगवान को वही भोग लगाना चाहिए जो सात्विक हो। उन्होंने कहा कि यदि श्रद्धा से घर पर एक रोटी पर घी लगाकर भी भोग लगा दिया जाए, तो श्रीकृष्ण प्रसन्न हो जाएंगे। पूजा में घर पर बनाए गए प्रसाद, जैसे पंचामृत, माखन-मिश्री, हलवा, पूरी, लड्डू या अन्य पारंपरिक व्यंजन, अधिक स्वीकार्य माने जाते हैं।
प्रेमानंद जी महाराज ने यह भी कहा कि यदि वास्तव में जन्माष्टमी को उत्सव की तरह मनाना चाहते हैं, तो वृंदावन आकर मनाएं। इस प्रकार, जन्माष्टमी पर केक काटने की बजाय पारंपरिक और सात्विक भोग से भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाना ही धार्मिक दृष्टि से सही माना गया है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।