क्रांतिकारी संत श्री तरुण सागर : जिसके कड़वे प्रवचन ने घोली जीवन में मिठास
सरलता से बयां करते थे गूढ़ बात
संत श्री तरुण सागर जी के प्रवचन में जीवन की गूढ़ से लेकर सामान्य बातों का समावेश होता था। जैसे संत श्री ने संस्कारों का महत्व बताते हुए लोगों को अगाह किया कि घर में बहू लाना, बहूरानी मत लाना, क्योंकि घर में बहू आएगी तो संस्कार लेकर आएगी लेकिन बहूरानी कार लेकर आएगी। जो संस्कार लेकर आएगी वह सिर के बल चली आएगी लेकिन जो कार लेकर आएगी वह अपनी ही सरकार चलाएगी
कड़वे प्रवचन की मिठास
मुनि श्री तरुण सागर जी महाराज हमेशा कहते कि अपनी वाणी को मीठी बनाओ जिससे जीवन सुखी रहे। समाज में समरसता फैलाने वाले उनके कड़वे प्रवचन आज लोगों के बीच जीवन में मिठास घोलने का काम कर रहे हैं।
सभी संतों से थी अलग अदा
लोगों का ध्यान केंद्रित करने के लिए वे महत्वपूर्ण बात को कहने के लिए अचानक से बहुत जल्दी और तेज आवाज में बोलते और उसे दोहराते थे। यही कारण था कि कोई भी व्यक्ति उनके द्वारा दिए गए सद्ज्ञान को कभी नहीं भूलता था।
अल्पायु में बनें संत
26 जून, 1967 को मध्य प्रदेश के दमोह में जन्में तरुण सागर ने 14 साल की उम्र में 8 मार्च 1981 को घर छोड़ दिया था। इसके बाद उन्होंने छत्तीसगढ़ में विधिवत दीक्षा ली थी। आचार्य पुष्पदंग सागर ने दी उन्हीं दीक्षा दी।