{"_id":"5c84dc16bdec22147760e9f5","slug":"know-sacred-mystery-of-these-10-divine-birds","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"ये हैं 10 दिव्य शक्ति वाले पक्षी, जानें इनके चमत्कारी और पवित्र होने का रहस्य","category":{"title":"Religion","title_hn":"धर्म","slug":"religion"}}
ये हैं 10 दिव्य शक्ति वाले पक्षी, जानें इनके चमत्कारी और पवित्र होने का रहस्य
Sun, 10 Mar 2019 04:48 PM IST
Ayush Jha
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: Ayush Jha
Updated Sun, 10 Mar 2019 04:48 PM IST
विज्ञापन
हस्तिनापुर सेंचुरी
- फोटो : अमर उजाला
सनातन धर्म में 10 ऐसे चमत्कारिक पक्षी हैं, जिन्हे अत्यंत पवित्र माना गया है। आइए ऐसे ही दिव्य और पवित्र पक्षियों के बारे में जानते हैं जिनका हिंदू धर्म में बहुत ही महत्व माना गया है। जिनका आदर एवं सम्मान करना प्रत्येक हिंदू का कर्तव्य है।
हंस
- फोटो : social media
हंस
जब कोई व्यक्ति सिद्ध हो जाता है तो कहते हैं कि उसने हंस पद को प्राप्त कर लिया है और वहीं जब कोई समाधि में चला जाता है तो कहते हैं कि वह परमहंस हो गया है। सनातन धर्म में परमहंस को सबसे बड़ा पद माना गया है। हंस को प्यार एवं पवित्रता का प्रतीक माना गया है। हंस को समस्त पक्षियों में सबसे विवेकी पक्षी माना गया है। हंस के विवेकी होने के कारण ही उसे ज्ञान और कला की देवी मां सरस्वती का वाहन माना जाता है। हिंदू धर्म में हंस को मारना पिता और गुरू की हत्या के समान है। मान्यता है कि हंस को मारने वाला व्यक्ति तीन जन्मों तक नर्क में ही रहता है।
जब कोई व्यक्ति सिद्ध हो जाता है तो कहते हैं कि उसने हंस पद को प्राप्त कर लिया है और वहीं जब कोई समाधि में चला जाता है तो कहते हैं कि वह परमहंस हो गया है। सनातन धर्म में परमहंस को सबसे बड़ा पद माना गया है। हंस को प्यार एवं पवित्रता का प्रतीक माना गया है। हंस को समस्त पक्षियों में सबसे विवेकी पक्षी माना गया है। हंस के विवेकी होने के कारण ही उसे ज्ञान और कला की देवी मां सरस्वती का वाहन माना जाता है। हिंदू धर्म में हंस को मारना पिता और गुरू की हत्या के समान है। मान्यता है कि हंस को मारने वाला व्यक्ति तीन जन्मों तक नर्क में ही रहता है।
नीलकंठ पक्षी
नीलकंठ
नीलकंठ को देखने मात्र से ही भाग्य का दरवाजा खुल जाता है। दशहरा पर्व पर इस पक्षी के दर्शन को शुभ और भाग्य को जगाने वाला माना जाता है। जिसके चलते दशहरे के दिन हर व्यक्ति इसी आस में छत पर जाकर आकाश को निहारता है, ताकि उसे नीलकंठ पक्षी के दर्शन हो जाए। मान्यता है कि विजयादशमी के दिन नीलकंठ पक्षी के दर्शन करने वाले व्यक्ति के घर में साल भर शुभ कार्य का सिलसिला चलता रहता है। कहते हैं कि श्रीराम ने इस पक्षी के दर्शन के बाद ही रावण पर विजय प्राप्त की थी।
नीलकंठ को देखने मात्र से ही भाग्य का दरवाजा खुल जाता है। दशहरा पर्व पर इस पक्षी के दर्शन को शुभ और भाग्य को जगाने वाला माना जाता है। जिसके चलते दशहरे के दिन हर व्यक्ति इसी आस में छत पर जाकर आकाश को निहारता है, ताकि उसे नीलकंठ पक्षी के दर्शन हो जाए। मान्यता है कि विजयादशमी के दिन नीलकंठ पक्षी के दर्शन करने वाले व्यक्ति के घर में साल भर शुभ कार्य का सिलसिला चलता रहता है। कहते हैं कि श्रीराम ने इस पक्षी के दर्शन के बाद ही रावण पर विजय प्राप्त की थी।
विज्ञापन
विज्ञापन
peacock feather
- फोटो : social media
मोर
मोर को पक्षियों का राजा माना जाता है। मोर शिव पुत्र कार्तिकेय का वाहन है। भगवान श्रीकृष्ण के मुकुट में लगा मोर पंख इस पक्षी की महत्ता को दर्शाता है। मोर भारत का राष्ट्रीय पक्षी है। सभी पुराणों और उपनिषदों में मोर का स्थान बहुत ऊंचा माना गया है। हिंदू धर्म में मोर की हत्या को महापाप माना गया है।
मोर को पक्षियों का राजा माना जाता है। मोर शिव पुत्र कार्तिकेय का वाहन है। भगवान श्रीकृष्ण के मुकुट में लगा मोर पंख इस पक्षी की महत्ता को दर्शाता है। मोर भारत का राष्ट्रीय पक्षी है। सभी पुराणों और उपनिषदों में मोर का स्थान बहुत ऊंचा माना गया है। हिंदू धर्म में मोर की हत्या को महापाप माना गया है।
विज्ञापन
कबूतर
कबूतर
कबूतर को कपोत भी कहते हैं। यह शांति का प्रतीक माना गया है। भगवान शिव ने जब अमरनाथ में पार्वती को अजर—अमर होने के वचन सुनाए थे, तो कबूतरों के एक जोड़े ने यह वचन सुन लिए थे, तभी से वे अजर-अमर हो गए। आज भी अमरनाथ की गुफा के पास कबूतर के ये जोड़े आपको दिखाई दे जाते हैं।
कबूतर को कपोत भी कहते हैं। यह शांति का प्रतीक माना गया है। भगवान शिव ने जब अमरनाथ में पार्वती को अजर—अमर होने के वचन सुनाए थे, तो कबूतरों के एक जोड़े ने यह वचन सुन लिए थे, तभी से वे अजर-अमर हो गए। आज भी अमरनाथ की गुफा के पास कबूतर के ये जोड़े आपको दिखाई दे जाते हैं।