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हनुमान जयंती 2018: कहां से मिलती है हनुमानजी को इतनी शक्ति, ये है इसके पीछे का कारण

Sat, 31 Mar 2018 10:32 AM IST
पूनम नेगी
पूनम नेगी Updated Sat, 31 Mar 2018 10:32 AM IST
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सेवाभाव निष्काम कर्म के लिए प्रेरित करता है। केसरीनंदन और अंजनीपुत्र हनुमान, इसके उत्कट उदाहरण हैं। वानर योनि के होते हुए भी महावीर अवतारी और अमर होने वाली सात दिव्य विभूतियों में एक हैं। बाकी छह अश्वत्थामा, बलि, व्यास, विभीषण, कृपाचार्य और परशुराम नव शरीर में रहे अवतार हैं। एक हनुमान ही हैं, जो इतर योनि के थे, लेकिन देव दनुज और मनुज सभी से वंदित। जिनका जन्म या अवतार ही भगवान राम की सहायता के लिए हुआ। महावीर हनुमान का जन्म चैत्र पूर्णिमा को हुआ था। इसी दिन उनका जन्म उत्सव मनाया जाता है। 

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हनुमान की स्तुति अतुलित महाबली के रूप में की जाती है। उन्होंने रावण और मेघनाद के शक्तिमद को भी धूल चटाई थी। कहते हैं कि द्वापर में भीम का भी दर्पदलन किया था। क्या था हनुमान का राज? उनकी स्तुति में एक पद है- "अष्टसिद्धि नवनिधि के दाता अस बर दीन्ह जानकी माता।" इसी दोहे में हनुमान की शक्ति का राज है।

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हनुमान रुद्र के अवतार माने जाते हैं और सूर्य के शिष्य। सूर्य से ज्ञान प्राप्त करते हुए, उन्होंने आठ सिद्धियां पाईं थीं। यही सिद्धियां हनुमान की शक्ति का स्रोत हैं। इन्हीं के बल पर, वे दुनिया को अपनी मुट्ठी में रखने का सामर्थ्य रखते हैं। पहली है, अणिमा अर्थात अपने आकार को मनचाहा विस्तार देने का सामर्थ्य। दूसरी है, लघिमा अर्थात छोटा और महाबली रूप करने की क्षमता। तीसरी, सिद्धि गरिमा से शरीर को जितना चाहे भारी बनाया जा सकता है। प्राप्ति सिद्धि के कारण हनुमान परम संतोषी हुए और उन्होंने राम के दिए मोतियों को भी कंकड़ के समान माना। पांचवीं, प्राकाम्य सिद्धि से व्यक्ति जो भी कामना करता है, वह तुरन्त पूरी हो जाती है। महिमा सिद्धि हासिल करके व्यक्ति अपनी महत्ता कहीं भी साबित कर सकता है। 

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लंका पर चढ़ाई के समय हनुमान ने कई बार इस सिद्धि का प्रयोग किया था। ईशित्व सिद्धि से कहते हैं कि व्यक्ति में ईश्वरत्व का वास हो जाता है यानी व्यक्ति में ईश्वर की शक्ति आ जाती है। इसी सिद्धि के कारण हनुमान जन-जन के आराध्य और पूज्य बन सके। आठवीं है, वशित्व सिद्धि। इस सिद्धि को प्राप्त करके किसी को भी अपने वश में किया जा सकता है। हनुमान जी ने अपनी इस सिद्धि से मन, वचन, कर्म से काम, क्रोध, मद, लोभ, दंभ, दुर्भाव, द्वेष, आवेश, राग-अनुराग सभी को अपने वश में कर लिया था। इन्हीं सिद्धियों ने हनुमान जी को महावीर बनाया था।

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हनुमान के जीवन के ऐसे कई प्रसंग हैं, जिनके उत्तर आसान नहीं हैं। उदाहरण के लिए, हनुमान जी को सिंदूर पसंद है, लेकिन महिलाओं के लिए उनकी पूजा मना है। इस विषय में सुधी विद्वान कई जानकारियां और अंतर्कथाएं सुनाते हैं। एक तो यह कि जब रावण को मारकर राम सीता को लेकर अयोध्या आए। हनुमान ने सीता को मांग में सिंदूर भरते हुए देखा। इसका कारण भी उन्होंने सीता से पूछ लिया। सीता ने कहा कि वह राम को प्रसन्न रखने के लिए सिंदूर लगाती हैं। राम को प्रसन्न रखने की यह युक्ति हनुमान को भा गई। उन्होंने काफी सारा सिंदूर अपने ऊपर उड़ेल लिया। और उसी अवस्था में राम के सामने पहुंचे। राम ने इसका कारण पूछा? हनुमान ने राम से कहा कि आपकी प्रसन्नता के लिए किया है। माता सीता भी यही बताती है। अब आप मुझसे भी उतने ही प्रसन्न रहना।

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