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Guru Nanak Jayanti 2020: गुरु नानक देव जी के जीवन के ये किस्से देते हैं बड़ी सीख

Mon, 30 Nov 2020 10:36 AM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Shashi Shashi Updated Mon, 30 Nov 2020 10:36 AM IST
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Guru Nanak Jayanti 2020 know interesting stories related to Nanak dev life
guru nanak jayanti 2020 - फोटो : अमर उजाला

हर वर्ष कार्तिक पूर्णिमा को गुरुनानक जयंती मनाई जाती है। इस वर्ष गुरुनानक जयंती 30 नवंबर यानी आज मनाई जा रही है। गुरुनानक देव जी सिखों के प्रथम(आदि) गुरु हैं। इन्होंने ही सिख धर्म की नींव रखी। गुरुनानक देव जी बचपन से ही सांसारिक बातों से दूर चिंतन में लगे रहते थे। नानक जी की स्कूली शिक्षा बहुत कम आयु में ही छूट गई थी। वे अपने विद्यालय में भी सत्संग के प्रश्न पूछा करते थे। जिसका उत्तर उनके अध्यापक भी नहीं दे पाते थे। अंत में हारकर उनके शिक्षक उन्हें घर छोड़ गए थे। जिसके बाद नानक जी का ज्यादातर समय चिंतन औऱ सत्संग में ही बीतता था। तीस वर्ष की आयु तक नानक जी का ज्ञान परिपक्व हो चुका था। नानक जी जगह-जगह जाकर लोगों के उपदेश देते थे। उन्होंने अपना पूरा जीवन लोगों की भलाई में लगा दिया। उनके जीवन के कई ऐसे किस्से हैं जिनसे जीवन की बड़ी सीख मिलती हैं। जानते हैं...

Guru Nanak Jayanti 2020 know interesting stories related to Nanak dev life
गुरु नानक जयंती 2020

एक बार गुरुनानक देव जी मक्का गए वहां जाने के बाद में आरामगाह में विश्राम करने के लिए लेट गए। उन्होंने अपने पैर मक्का की ओर किए थे। हाजियों की सेवा में लगे जियोन नाम के शख्स ने जब यह देखा तो वह नाराज हो गया और बोला-आप मक्का मदीना की तरफ चरण करके क्यों लेटे हैं? नानक जी ने उससे कहा कि ‘अगर तुम्हें अच्छा नहीं लग रहा, तो खुद ही चरण उधर कर दो, जिधर खुदा न हो।’ वह सेवक जिस ओर भी नानक जी के चरण करता मक्का उधर ही हो जाता। वह इस चमत्कार को देखकर आश्चर्यचकित हो गया। तब नानक जी ने जियोन को समझाया कि हर दिशा में खुदा है। सच्चा साधक वही है जो अच्छे काम करता हुआ खुदा को हमेशा याद रखता है।

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गुरू नानक जयंती 2020

एक बार नानक देव जी अपने शिष्य मरदाना के साथ कंगनवाल पहुंचे। वहां के लोग किसी का सम्मान नहीं करते थे। उन्होंने वहां देखा कि लोग दूसरों को परेशान कर रहे हैं। उस गांव से निकलते हुए नानक जी ने उन्हें आशीर्वाद दिया कि हमेशा यहीं बसते रहो। उसके बाद नानक जी दूसरे गांव पहुंचे, वहां के लोग बहुत अच्छे थे। सभी ने नानक जी का बहुत सम्मान किया। अगले दिन जब नानक जी गांव से चले तो उन्होंने आशीर्वाद दिया कि सब तरफ बिखर जाओ। नानक जी के इस व्यव्हार पर मरदाना को बहुत आश्चर्य हुआ। उसने पूछा-जिन्होंने अपशब्द कहे, उन्हें बसने का और जिन्होंने सत्कार किया, उन्हें आपने बिखर जाने का आशीर्वाद दिया, ऐसा क्यों? नानक जी कहा कि बुरे लोग एक जगह रहें, ताकि बुराई न फैले और अच्छे लोग हर तरफ फैलें ताकि अच्छाई का प्रसार हो। 

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गुरु नानक जयंती 2020

गुरुनानक देव जी की पढ़ाई छूट जाने के बाद उनके पिता उन्हें लेकर चिंतित रहते थे, तब उन्होंने नानक जी को को बहनोई जैराम जी के जरिए सुल्तानपुर लोधी के नवाब के शाही भंडार की देखरेख करने के लिए लगा दिया गया। इसी से जुड़ा हुआ उनका एक प्रसंग प्रचलित है। एक बार वे तराजू से अनाज तौलकर ग्राहक को दे रहे थे, तोल करते समय गिनते-गिनते जब 11, 12, 13 पर पहुंचे तो उन्हें कुछ अनुभूति हुई। वह तौलते जाते थे और 13 के बाद ‘तेरा फिर तेरा और सब तेरा ही तेरा’ कहते गए। इस घटना के बाद वह मानने लगे थे कि ‘जो कुछ है वह परमबह्म्र का है, मेरा क्या है?’  
 

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