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Dev Diwali 2020: कार्तिक पूर्णिमा पर बनारस में देव दीपावली आज, जानिए इसका महत्व

Mon, 30 Nov 2020 08:11 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विनोद शुक्ला Updated Mon, 30 Nov 2020 08:11 AM IST
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kartik purnima 2020 dev diwali guru purnima date and importance of kartik purnima
देव दीपावली 2020: भगवान विष्णु के योग निद्रा से जागने पर सभी देवता प्रसन्न होते हैं। - फोटो : अमर उजाला
Kartik Purnima 2020: आज कार्तिक मास की पूर्णिमा है और इस तिथि पर देव दीपावली का पर्व मनाया जाता है। वाराणसी में देव दीपावली का उत्सव बहुत ही भव्य होता है। हिंदू धर्म में कार्तिक मास की पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है। शास्त्रों में सभी 12 महीनों में कार्तिक महीने को आध्यात्मिक एवं शारीरिक ऊर्जा संचय के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। पुराणों के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा के दिन स्नान, दान-पुण्य और दीपदान करने का बहुत महत्व है। इस दिन गंगा या अन्य किसी पवित्र नदी अथवा जलकुंड में स्नान करना बहुत फलदाई है। परन्तु इस साल कोरोना महामारी के चलते नदियों में स्न्नान करना संभव न हो तो घर पर सूर्योदय से पूर्व नहाने के जल में गंगा जल डालकर स्न्नान कर सकते हैं। मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा पर इन कामों को करने से आपके जीवन में सुख-सौभाग्य की बरसात होगी वहीं कुछ काम ऐसे है जिन्हें इस दिन करने से आपका जीवन कष्टों से भर सकता है। आइए जानते हैं कार्तिक माह की पूर्णिमा का इतना महत्व क्यों है।


 
kartik purnima 2020 dev diwali guru purnima date and importance of kartik purnima
त्रिपुरासुर के वध होने की खुशी में सभी देवता स्वर्गलोक से उतरकर काशी में दीपावली मनाते हैं।

धार्मिक मान्यता के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा की तिथि पर भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नामक राक्षस का वध किया था,जिससे देवगण बहुत प्रसन्न हुए और भगवान विष्णु ने शिवजी को त्रिपुरारी नाम दिया जो शिव के अनेक नामों में से एक है। त्रिपुरासुर के वध होने की खुशी में सभी देवता स्वर्गलोक से उतरकर काशी में दीपावली मनाते हैं।

तारों की छांव में स्नान
कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगाजी या अन्य नदियों में स्नान करना बहुत पुण्यकारी माना गया है। स्नान का उत्तम समय सूर्योदय से पूर्व माना जाता है। जब आकाश में तारागण दिखाई दे रहा हो। ब्रह्मा, विष्णु, महेश, आदित्य, मरुदगण तथा अन्य सभी देवी-देवता कार्तिक पूर्णिमा पर पुष्कर में स्नान करते है। मान्यता है कि देवों की दीपावली मानी जाने वाली कार्तिक पूर्णिमा पर विधिवत स्न्नान करने से भगवान विष्णु की कृपा हमेशा बनी रहती है। यदि आप गंगा स्नान करने नहीं जा सकते तो आप घर में ही थोड़ा सा गंगाजल नहाने के पानी में मिलाकर स्नान करें।

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पुराणों के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा की तिथि पर ही भगवान विष्णु ने धर्म, वेदों की रक्षा के लिए मत्स्य अवतार धारण किया था।

उगते हुए सूर्य को अर्घ्य
पदमपुराण के अनुसार पूजा, तपस्या, यज्ञ आदि से भी श्री हरि को उतनी प्रसन्नता नहीं होती, जितनी कि प्रातः स्नान कर जगत को प्रकाश देने वाले भगवान सूर्य को अर्घ्य देने से होती है। इसलिए सभी पापों से मुक्ति और भगवान वासुदेव की प्रीति प्राप्त करने के लिए प्रत्येक मनुष्य को नियमित सूर्य मंत्र का उच्चारण करते हुए सूर्य को अर्घ्य अवश्य प्रदान करना चाहिए।
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हिंदू धर्म में कार्तिक का महीना बहुत ही विशेष होता है क्योंकि इस महीने में सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु चार महीने के बाद योग निद्रा से जागते हैं। हिंदू कैलेंडर के अनुसार आषाढ़ शुक्ल एकादशी से भगवान विष्णु चार मास के लिए योग निद्रा में लीन होकर कार्तिक शुक्ल एकादशी को जागते हैं। भगवान विष्णु के योग निद्रा से जागने पर सभी देवता प्रसन्न होते हैं। इस खुशी में देवी-देवताओं ने पूर्णिमा को लक्ष्मी-नारायण की महाआरती करके दीप प्रज्वलित किए। यह दिन देवताओं की दीपावली है।

दान से दूर होंगे कष्ट
कार्तिक पूर्णिमा के दिन अन्न, दूध, फल, चावल, तिल और आवंले का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन ब्राह्मण, बहन और बुआ को अपनी श्रद्धा के अनुसार वस्त्र और दक्षिणा अवश्य दें। शाम के समय जल में थोड़ा कच्चा दूध, चावल और चीनी मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य देने से आप पर चंद्रमा की सदैव कृपा बनी रहती है। लक्ष्मी जी की कृपा पाने के लिए इस दिन मीठा दूध मिलाकर जल अवश्य चढ़ाएं, क्योंकि इस दिन पीपल के पेड़ पर मां लक्ष्मी का वास माना जाता है।

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Karthik Purnima 2020 - फोटो : अमर उजाला

कार्तिक पूर्णिमा का महत्व महाभारत से भी जुड़ा है। कथा के अनुसार जब कौरवों और पांडवों के बीच महाभारत का युद्ध समाप्त हुआ तब पांडव इस बात को लेकर बहुत ही परेशान और दुखी हुए कि युद्ध में उनके कई सगे- संबंधियों की मृत्यु हो गई। असमय मृत्यु के कारण वे सोचने लगे कि इनकी आत्मा को शांति कैसे मिलेगी। तब भगवान श्रीकृष्ण ने पांडवों को चिंता को दूर करने के लिए कार्तिक शुक्लपक्ष की अष्टमी से लेकर कार्तिक पूर्णिमा तक पितरों की आत्मा की तृप्ति के लिए तर्पण और दीपदान करने को कहा था। तभी से कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान और पितरों को तर्पण देने के लिए इस तिथि का महत्व होता है।

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