इस साल गंगा दशहरा 24 मई को पड़ रहा है। ज्योतिषशास्त्र की मानें तो इस बार गंगा दशहरा अद्भुत और महाफल दायक है।
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गंगा दशहरा 2018: इस बार बन रहा है अद्भुत संयोग, करेंगे ऐसा तो होगा महा फलदायक
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 24 May 2018 09:36 AM IST
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- फोटो : sun
ज्योतिषाचार्य प्रकाश पांडे ने बताया कि 24 मई को पड़ने वाली गंगा दशहरा में गर करण, वृषस्थ सूर्य, कन्या का चन्द्र होने से अद्भुत संयोग प्राप्त बन रहा है। जो महाफलदायक है। इस बार योग विशेष का बाहुल्य होने से इस दिन स्नान, दान, जप, तप, व्रत, और उपवास आदि करने का बहुत ही महत्व है।
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- फोटो : shivling
इस वर्ष गंगा दशहरा ज्येष्ठ अधिकमास में होने से पूर्वोक्त कृत्य शुद्ध की अपेक्षा मलमास में करने से अधिक फल होता है। दशहरा के दिन काशी दशाश्वमेध घाट में दश प्रकार स्नान करके, शिवलिंग का दस संख्या के गन्ध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य और फल आदि से पूजन करके रात्रि को जागरण करें तो अनन्त फल होता है।
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गंगा दशहरा के दिन गंगा में या पास के किसी भी जलाशय या घर के शुद्ध जल से स्नान करके किसी साक्षात् मूर्ति के समीप बैठ जाए और फिर 'ऊँ नमः शिवायै नारायण्यै दशहरायै गंगायै नमः' का जाप करें। फिर 'ऊँ नमः शिवायै नारायण्यै दशहरायै गंगायै स्वाहा' करके हवन करे। तत्पश्चात ' ऊँ नमो भगवति ऐं ह्रीं श्रीं( वाक्-काम-मायामयि) हिलि हिलि मिलि मिलि गंगे मां पावय पावय स्वाहा।' इस मंत्र से पांच पुष्पाञ्जलि अर्पण करके गंगा को भूतल पर लाने वाले भगीरथ का और जहाँ से वे आयी हैं, उस हिमालय का नाम- मंत्र से पूजन करे।
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- फोटो : amar ujala
फिर दस फल, दस दीपक और दस सेर तिल का 'गंगायै नमः' कहकर दान करे। साथ ही घी मिले हुए सत्तू के और गुड़ के पिण्ड जल में डालें। सामर्थ्य हो तो कच्छप, मत्स्य और मण्डूकादि भी पूजन करके जल में डाल दें। इसके अतिरिक्त 10 सेर तिल, 10 सेर जौ, 10 सेर गेहूँ 10 ब्राह्मण को दें। इतना करने से सब प्रकार के पाप समूल नष्ट हो जाते हैं और दुर्लभ- सम्पत्ति प्राप्त होती है।