रामायण में भगवान राम की लीलाओं का उल्लेख मिलता है जिसमें भगवान राम के जन्म से लेकर, भगवान राम के वनवास, रावण वध, राम का राज्याभिषेक, फिर सीता का त्याग और अंत में राम का अपने पुत्रों से मिलाप होता है। इस पूरे घटना क्रम में पांच महिलाओं का जिक्र आया है जिसने भगवान राम को सबसे ज्यादा कष्ट दिया और इनके कारण ही भगवान राम के जीवन में अलग-अलग मोड़ आते रहे।
इन पांच औरतों के कारण भगवान राम को बार-बार कष्ट भोगना पड़ा
भगवान राम की तीन मां थी कौशल्या जिन्होंने भगवन राम को जन्म दिया था। दूसरी थी कैकेय जिनके पुत्र थे भरत और तीसरी मां थी सुमित्रा जिनके पुत्र थे लक्ष्मण और शत्रुघ्न। भगवान राम को कष्ट देने वाली में इनकी दूसरी मां कैकेय का नाम सबसे पहले आता है क्योंकि इन्होंने ही अपने पुत्र भरत को राजा बनवाने के लिए राम के वनवास की मांग रखी थी। इस तस्वीर में उस घटना को दिखाया गया है जब कैकेय कोपभवन में रूठ कर बैठ गई थी कि राम को वनवास भेजा जाए।
इन पांच औरतों के कारण भगवान राम को बार-बार कष्ट भोगना पड़ा
मंथरा यह है भगवान राम को कष्ट देने वाली दूसरी महिला। कैकेय की यह दासी विवाह के बाद कैकेय के साथ ही अयोध्या आई थी। कैकेय को भड़काने और राम को वनवास भेजने के लिए उकसाने का काम इसी ने किया था। इसकी सजा मंथरा को अगले जन्म में भोगना पड़ा था जब इसे एक कुबड़ी के रूप में जन्म लेना पड़ा। भगवान श्री कृष्ण ने कुबड़ी को पाप मुक्त कर स्वस्थ्य बनाया।
इन पांच औरतों के कारण भगवान राम को बार-बार कष्ट भोगना पड़ा
भगवान राम को कष्ट देने वाली महिलाओं में तीसरा नाम आता है रवण की बहन सूर्पणखा का। इसने भगवान राम को लक्ष्मण के सामने विवाह का प्रस्ताव रखा। लेकिन जब राम और लक्ष्मण ने विवाह का प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया तब इसने देवी सीता को मारने का प्रयास किया। लक्ष्मण ने क्रोधित होकर सूर्पणखा की नाक काट दी। सूर्पणखा ने रावण से शिकायत की जिससे रावण ने देवी सीता का हरण कर लिया।
इन पांच औरतों के कारण भगवान राम को बार-बार कष्ट भोगना पड़ा
भगवान राम के राज्याभिषेक के बाद एक अजब घटना हुई। एक धोबन अपने मायके से पति के घर लौट रही थी रास्ते रात हो जाने के कारण वह एक व्यक्ति के घर में ठहर गई। धोबी ने अपनी पत्नी को घर में रखने इंकार कर दिया। उसका कहना था कि उसकी पत्नी दूसरे के घर में रहकर आई है इसलिए वह अब इस योग्य नहीं है कि उसे अपने घर में रखा जाए। धोबन ने भगवान राम और देवी सीता का उदाहरण दिया कि राम ने देवी सीता को अपना लिया जबकि वह एक वर्ष तक रावण के यहां रही। धोबन और धोबी का मामला इतना बढ़ गया कि मामला राम दरबार में पहुंचा और अंत में भगवान राम को देवी सीता पर भरोसा होते हुए भी राजा की मर्यादा का पालन करते हुए सीता का त्याग करना पड़ा।