इतिहास में सबसे बड़े युद्ध के रूप में महाभारत को जाना जाता है। इस युद्ध में करोड़ों की संख्या में जानें गई थी और इसकी वजह सिर्फ दो चचेरे भाईयों कौरव और पांडवों के बीच की दुश्मनी थी। इस दुश्मनी का सबसे बड़ा कारण कोई था तो वह हस्तिनापुर के राजा धृतराष्ट्र थे। यह बात हम यूं ही नहीं कह रहे हैं। आप भी इन 10 बातों को जानेंगे तो यही कहेंगे कि धृतराष्ट्र यह गलती नहीं करते तो महाभारत का महाविनाश नहीं होता।
धृतराष्ट्र की 10 गलतियां बनी कौरव-पांडवों में तकरार और युद्ध की वजह
धृतराष्ट्र पांडु से बड़े थे लेकिन जन्म से ही नेत्रहीन होने के कारण धृतराष्ट्र को हस्तिनापुर का राजा नहीं बनाया गया और उनसे छोटे पांडु को राजगद्दी पर बैठाया गया। इस बात से धृतराष्ट्र पांडु से मन ही मन द्वेष भाव रखते थे। यह द्वेष भाव इतना बढ़ गया था कि पांडु के पुत्रों को हमेशा राजगद्दी से दूर रखने का प्रयास किया ताकि वह उनसे राजगद्दी न मांग ले।
धृतराष्ट्र की 10 गलतियां बनी कौरव-पांडवों में तकरार और युद्ध की वजह
शकुनी हस्तिनापुर का विनाश चाहने वाला था। इस बात को भीष्म और विदुर ने कई बार धृतराष्ट को समझाना चाहा लेकिन धृतराष्ट्र शकुनी को अपना शुभ चिंतक माने बैठा था। परिणाम यह हुआ कि शकुनी ने दुर्योधन के मन में पांडवों के प्रति इतनी कड़वाहट भर दी कि दुर्योधन पांडवों को अपना शत्रु बना लिया।
धृतराष्ट्र की 10 गलतियां बनी कौरव-पांडवों में तकरार और युद्ध की वजह
दुर्योधन के जन्म के समय ही ज्योतिषियों ने कहा था कि यह कुरू वंश के विनाश का कारण बनेगा। धृतराष्ट्र से कहा गया था कि दुर्योधन को राजमहल में नहीं रखा जाए लेकिन मोह में फंसे धृतराष्ट्र ने ऐसा नहीं किया और वही हुआ जिसकी आशंका ज्योतिषियों जताई थी।
धृतराष्ट्र की 10 गलतियां बनी कौरव-पांडवों में तकरार और युद्ध की वजह
धृतराष्ट्र ने हमेशा दुर्योधन की गलतियों पर पर्दा डालने काम किया। वार्णाव्रत में पाण्डवों को लाक्षागृह में जालाकर मारने की योजना दुर्योधन ने बनाई लेकिन पाडव सौभाग्य से जीवित बच गए। इस बात की जानकारी होने के बावजूद धृतराष्ट्र ने इस बात पर पर्दा डालने का काम किया।