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Dhanteras 2020: धनतेरस और नरकचतुर्दशी तिथि मनाने को लेकर है असमंजस, जानिए सही तिथि
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: Shashi Shashi
Updated Fri, 13 Nov 2020 08:52 AM IST
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कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर धनतेरस के साथ पांच दिवसीय दीपोत्सव यानि दिवाली के पर्व का आंरभ हो जाता है जो भाई दूज तक चलता है। धनतेरस पर धनवंतरी भगवान की पूजा का प्रावधान है तो वहीं इस दिन कुछ लोग शिव प्रदोष व्रत भी करत है। धनतेरस के अगले दिन चतुर्दशी तिथि होती है। जिसे नरकचतुर्दशी, रुपचौदस और छोटी दिवाली के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भी मासिक शिवरात्रि का व्रत करके लोग नरकचतुर्दशी का पूजन करते हैं। लेकिन इस बार यह त्योहार 5 दिन की बजाय 4 दिन का पड़ रहा है। तिथियों को हेर-फेर के कारण लोग उलझन में हैं कि किस दिन क्या किया जाए। अगर आप भी इसी असमंजस की स्थिति में है कि धनतेरस का पूजन कब करें और नरकचतुर्दशी कब मनाएं तो आपकी उलझन दूर हो सकती है। जानिए त्रयोदशी और चतुर्थी तिथि के मुहूर्त की पूरी जानकारी...
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ग्रह नक्षत्रों की गणना के अनुसार इस वर्ष कार्तिक मास की कृष्ण त्रयोदशी तिथि 12 नवंबर दिन गुरुवार को रात 9:30 पर आरंभ हो जाएगी जो 13 नवंबर दिन शुक्रवार को शाम 5:59 बजे तक रहेगी। त्रयोदशी तिथि के उदया तिथि और प्रदोष काल में होने की वजह से 13 नवंबर दिन शुक्रवार को धनतेरस का पर्व मनाना शुभ रहेगा। जो लोग प्रदोष व्रत करेंगे उनके लिए भी धनतेरस का दिन शुभ रहेगा।
13 नवंबर की संध्या समय पर 51:59 से चतुर्थी तिथि लगेगी जो 14 नवंबर को दोपहर के समय 2:18 बजे तक रहेगी।
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चतुर्दशी तिथि को सूर्योदय से पूर्व स्नान करने की परंपरा है। शास्त्रों के अनुसार जिस जिन चतुर्दशी तिथि लगी हो उसी दिन रूप चतुर्दशी का स्नान करना चाहिए। मान्यता है कि इससे रूप सौंदर्य की प्राप्ति होती है और मृत्यु के पश्चात मनुष्य को यमलोक के दर्शन नहीं होते हैं। इसलिए चतुर्दशी तिथि का स्नान 13 नवंबर को ही किया जाएगा।
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जो लोग नरकचतुर्दशी का व्रत करते हैं और मासिक शिवरात्रि का व्रत करते हैं, उन्हें भी इस बार धनतेरस के दिन यानि 13 नवंबर को ही व्रत करना चाहिए। 13 नवंबर को चतुर्दशी का व्रत करने पीछे कारण है कि जिस दिन मध्यरात्रि के समय चतुर्दशी आरंभ होती है उसी दिन व्रत करने का प्रावधान होता है। चतुर्दशी तिथि को ही मासिक शिवरात्रि का व्रत किया जाता है। 14 नवंबर के दिन मध्य रात्रि के समय अमावस्या तिथि होगी। इस कारण 14 नवंबर को चतुर्दशी का व्रत करने पर वह दिवाली व्रत के रुप में मान्य होगा। 14 नवंबर की रात्रि में लक्ष्मी पूजन किया जाएगा।
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