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Dev Diwali 2020: अमावस्या के 15 दिन बाद मनाई जाती है देव दिवाली, जानिए धार्मिक महत्व और शुभ मुहूर्त

Mon, 30 Nov 2020 10:41 AM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Shashi Shashi Updated Mon, 30 Nov 2020 10:41 AM IST
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dev diwali 2020 Know the religious significance of Dev Diwali auspicious time and date
dev diwali 2020 - फोटो : अमर उजाला

हर वर्ष कार्तिक मास की अमावस्या को दिवाली का त्योहार मनाया जाता है लेकिन क्या आपको पता है दिवाली के पंद्रह दिन बाद देव दिवाली भी मनाई जाती है। इस दिन का विशेष महत्व माना जाता है। कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि को देव दिवाली के रूप में मनाया जाता है। इस बार कार्तिक मास की पूर्णिमा 30 नवंबर को पड़ रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन देवलोक से सभी देवता वाराणसी यानि महाकाल की नगरी काशी में पधारते हैं। इसलिए कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि को काशी में बहुत साज-सज्जा की जाती है। तो चलिए जानते हैं देव दिवाली का महत्व शुभ मुहूर्त और कथा

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देव दीवाली

देव दीवाली 2020 तिथि मुहूर्त
पूर्णिमा तिथि 29 नवंबर 2020 की रात 12 बजकर 47 मिनट से आरंभ हो जाएगी जो 30 नवंबर 2020 को रात 02 बजकर 59 मिनट को समाप्त होगी। देव दिवाली पर भी प्रदोष काल में पूजा की जाती है। इस बार देव दिवाली पर पूजा करने का शुभ मुहूर्त  30 नवंबर को संध्या के समय 05.08 बजे से लेकर 07.47 बजे तक है। 

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dev diwali - फोटो : Instagram
जानते हैं देव दीवाली का धार्मिक महत्व
पौराणिक कथाओं के अनुसार त्रिपुरासुर नामक राक्षस के अत्याचारों से सभी बहुत त्रस्त हो चुके थे। तब सभी को उसके आतंक से मुक्ति दिलाने के लिए भगवान शिव ने उस राक्षस का संहार कर दिया। जिससे सभी को उसके आतंक से मुक्ति मिल गई। जिस दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर राक्षस का संहार किया था, वह कार्तिक पूर्णिमा का दिन था। तभी से भगवान शिव का एक नाम त्रिपुरारी पड़ा। इससे सभी देवों को अत्यंत प्रसन्नता हुई। तब सभी देवतागण भगवान शिव के साथ काशी पहुंचे और दीप जलाकर खुशियां मनाई। कहते हैं कि तभी से ही काशी में कार्तिक पूर्णिमा के दिन देव दिवाली मनाई जाती रही है। इस दिन  दीप दान का बहुत महत्व माना गया है। इसलिए इस दिन विशेष रूप से दीपदान किया जाता है।
 
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dev diwali
कार्तिक पूर्णिमा का महत्व
कार्तिक पूर्णिमा के दिन देव दिवाली के साथ गुरु पर्व यानि गुरुनानक जयंती भी मनाई जाती है। इसलिए इस दिन का महत्व बहुत बढ़ जाता है। कार्तिक पूर्णिमा पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए हरिद्वार जाते हैं। इस दिन गंगा स्नान करने से सभी पापों का नाश हो जाता है और मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है। 

 
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