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Chaitra Navratri 2022 : इस बार घोड़े पर सवार होकर आ रहीं मां दुर्गा, जानें क्या होते हैं इसके परिणाम और कैसे करें पूजा

Sat, 02 Apr 2022 12:03 AM IST
आशिकी पटेल धर्म डेस्क, अमर उजला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजला, नई दिल्ली Published by: आशिकी पटेल Updated Sat, 02 Apr 2022 12:03 AM IST
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Chaitra Navratri 2022 date puja vidhi maa durga vahan kalash sthapana shubh muhurat
इस बार घोड़े पर सवार होकर आ रही हैं मां दुर्गा - फोटो : iStock

Chaitra Navratri 2022: आज से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हो रही है, जो कि 11 अप्रैल तक रहेगी। इस साल एक भी तिथि का क्षय ना होने से ये धार्मिक पर्व नौ दिनों तक माता रानी की आराधना के साथ मनाया जाएगा। खास बात ये है कि इन नौ दिनों में कई ऐसे योग बन रहे हैं, जो सर्व फलदायी हैं। हालांकि, इस बार मां दुर्गा की सवारी अनहोनी की ओर इशारा कर रही है क्योंकि इस बार मां दुर्गा घोड़े पर सवार होकर आ रही हैं। मां का ऐसा आगमन शुभ नहीं माना जाता। इससे कई गंभीर परिणाम देखने को मिलते हैं। इस चैत्र नवरात्रि में कुछ ऐसे ही बड़े बदलाव हैं। नौ दिनों तक कैसे करें पूजा-पाठ कि आपको सारे फल मिलें। ऐसा क्या करें कि अनहोनी के प्रभाव को कम किया जा सके। इन्हीं सब बातों को हम बता रहे हैं। आइए जानते हैं संपूर्ण नौ दिनों की उपासना और मां को घोड़े पर सवार होकर आने के परिणामों के बारे में...

Chaitra Navratri 2022 date puja vidhi maa durga vahan kalash sthapana shubh muhurat
इस बार घोड़े पर सवार होकर आ रही हैं मां दुर्गा - फोटो : iStock
चैत्र नवरात्रि का प्रारंभ

चैत्र प्रतिपदा तिथि को घटस्थापना की जाती है और अष्टमी एवं नवमी तिथि पर कन्या पूजन के बाद व्रत का पारण किया जाता है। इस वर्ष चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा 2 अप्रैल 2022 दिन शनिवार को हो रहा है। चढ़ती का व्रत 2 अप्रैल को किया जाएगा। प्रतिपदा से लेकर के नवमी तक माता भगवती के नौ रूपों की उपासना की जाती है। 

Chaitra Navratri 2022 date puja vidhi maa durga vahan kalash sthapana shubh muhurat
इस बार घोड़े पर सवार होकर आ रही हैं मां दुर्गा - फोटो : Chaitra Navratri
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त 

नवरात्रि में कलश स्थापना की प्राचीन परंपरा है। कलश स्थापना के लिए सही तिथि और मुहूर्त का बड़ा महत्व होता है। वैसे तो पूरे दिन भर कलश स्थापना की जा सकती है, लेकिन प्रतिपदा तिथि में ही कलश स्थापना का विशेष विधान है। पंचांग के अनुसार, सूर्योदय से लेकर के दिन में 12 बजकर 28 मिनट तक कलश स्थापित कर लिया जाए तो अति उत्तम होगा। उसमें भी यदि शुभ चौघड़िया प्राप्त हो जाए तो और भी शुभ फल की वृद्धि हो जाती है। सुबह 7 बजकर 30 मिनट से लेकर के 9 बजे बजे तक और दोपहर में 12 बजे से लेकर के 12 बजकर 28 मिनट तक शुभ चौघड़िया प्राप्त हो रही हैं, जो कलश स्थापना के लिए सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त होगा।

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इस बार घोड़े पर सवार होकर आ रही हैं मां दुर्गा - फोटो : iStock
अष्टमी और नवमी कब है?

वहीं महा अष्टमी का व्रत 9 अप्रैल दिन शनिवार को किया जाएगा। फिर रामनवमी का पावन 10 अप्रैल दिन रविवार को बड़े ही धूमधाम से मनाया जाएगा। इसके बाद नवरात्र व्रत का पारण 11 अप्रैल दिन सोमवार को दशमी तिथि में प्राप्त किया जाएगा। 

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इस बार घोड़े पर सवार होकर आ रही हैं मां दुर्गा - फोटो : iStock
इस बार क्या है माता का वाहन? 

देवी भागवत पुराण के अनुसार, नवरात्र में माता के आगमन और गमन के दौरान वाहन का विशेष महत्व होता है। इस बार मां दुर्गा घोड़े पर सवार होकर आ रही हैं। घोड़े पर सवार होकर माता रानी का धरती पर आगमन शुभ नहीं माना जाता है। इससे कई गंभीर परिणाम देखने को मिलते हैं।

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