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नवरात्रि 2018: मां दुर्गा के साथ करें इन तीन देवियों की आराधना, जानें नवरात्रि के नियम और पूजा विधि

Sat, 17 Mar 2018 09:06 AM IST
सविता शर्मा, ज्योतिषाचार्य
सविता शर्मा, ज्योतिषाचार्य Updated Sat, 17 Mar 2018 09:06 AM IST
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chaitra navratri 2018 navratri puja importance and significance of navratri

नवरात्र में देवी की नौ शक्तियों की पूजा की जाती है, लेकिन मूल में तीन देवियां ही हैं- महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती। ये तीनों देवियां तीनों महादेवों की शक्ति हैं। नवरात्र में इन्हीं तीन शक्तियों की अलग-अलग रूप में पूजा की जाती है। 

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मां लक्ष्मी रूप की पूजा
शक्ति स्वरूपा मां लक्ष्मी धनप्रदायनी हैं। लक्ष्मी से ही वैभव और यश मिलता है। वैसे लक्ष्मी की प्राप्ति सहज नहीं है। लक्ष्मी चंचला है, वह एक जगह टिक कर नहीं रहतीं, इसलिए शास्त्रों का मत है कि इनकी आराधना कभी भी अकेले नहीं करनी चाहिए। श्रीनारायण के साथ इनकी आराधना करें। देवी को अहंकार पसंद नहीं है। नवरात्र की नवमी महालक्ष्मी का दिन है। इस दिन इनकी विशेष आराधना करनी चाहिए।

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विद्या की देवी
सामाजिक मान-प्रतिष्ठा का दूसरा आधार विद्या है। ज्ञान, कला, संगीत, गुणों से ही किसी व्यक्ति की समाज में पहचान होती है। उसको यश प्राप्त होता है। और इसकी प्राप्ति के लिए मां सरस्वती की आराधना जरूरी है। लक्ष्मी अस्थिर हैं, चंचल हैं, लेकिन सरस्वती जी स्थायी हैं, शांत हैं और अपरिवर्तनशील हैं। लक्ष्मीजी धातु हैं और उनको प्राप्त करने की शक्तिप्रदात्री सरस्वती हैं, जो सुर, संगीत, भाषा, विज्ञान, कौशल, विद्या में निहित हैं। देवी सरस्वती का मंत्र है-व्यय (ज्ञान) करो, जितना कर सको। सरस्वती ही अपने ज्ञान से बच्चे को ज्ञान की ओर प्रवृत्त करती हैं। अतः नवरात्र में इस स्वरूप की भी पूजा करें।  

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सौंदर्य व आरोग्य की देवी
सौभाग्य और सौंदर्य की देवी मुख्यतयाः पार्वती और महालक्ष्मी दोनों हैं। मां के रूप में पार्वती ही पूज्य हैं। अक्षत सुहाग के रूप में लक्ष्मी जी की पूजा होती है। कौमारी के रूप में भी पार्वती की ही पूजा होगी, लक्ष्मी की नहीं। कन्या पूजन भी उसी के निमित है। ये समस्त पूजा क्रमश: श्रीनारायण और शंकरजी के साथ करनी चाहिए। नवरात्र प्रमुख रूप में आरोग्य का ही उत्सव है। ऋतु परिवर्तन से इसका नाता है। यह अपने शरीर का शोधन है।

देवी का पहला स्वरूप शैलपुत्री के रूप में प्रकृति का अर्चन है। नवरात्र का प्रारंभ ही भगवान शंकर की शक्ति शैलपुत्री से होता है। मां पार्वती सुख-शांति और सौभाग्य की देवी हैं। गौरी की पूजा भगवान गणेश और शंकर जी के साथ करने से सारे मनोरथ पूर्ण होते हैं। इसी तरह माता पार्वती गृहस्थ जीवन में सुख-शांति, संतान और सौभाग्य की देवी हैं। नवरात्र की प्रथम, तृतीय, पंचम, सप्तम और आठवां दिन भगवान शंकर की शक्ति को ही समर्पित है। शास्त्रों में महिलाओं और लड़कियों के लिए शिवानी की आराधना ही श्रेष्ठ बताया गया है।

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नवरात्र के नियम

नवरात्रों में सबको व्रत रखना चाहिए। अन्न आहार, फलाहार, दुग्ध आहार अर्थात् जैसी जिसकी क्षमता हो, उसी के अनुसार उसे व्रत करना चाहिए। मान्यता है कि व्रत करने से आने वाले छह महीने तक जातक बीमार नहीं होता। नवरात्र के नौ दिनों तक ब्रह्मचर्य का पालन अवश्य करें, ताकि शक्ति क्षीण न हो और व्रत का पूर्ण फल मिल सके। भूमि पर शयन यानी जमीन पर सोना चाहिए। इन नौ दिनों में केश/दाढ़ी आदि नहीं कटवाना चाहिए। व्रत के दौरान सत्य का पालन करें।

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