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Chhadi Mar Holi 2023: इस दिन मनाई जाएगी गोकुल में छड़ीमार होली, जानिए कैसे शुरू हुई ये अनूठी परंपरा

Thu, 23 Feb 2023 09:41 AM IST
आशिकी पटेल धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: आशिकी पटेल Updated Thu, 23 Feb 2023 09:41 AM IST
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Braj Ki Holi Chhadi Mar Holi 2023 kab hai date tradition Holi In Mathura Gokul
इस दिन मनाई जाएगी गोकुल में छड़ीमार होली, जानिए कैसे शुरू हुई ये अनूठी परंपरा - फोटो : अमर उजाला

Braj Ki Holi 2023, Chhadi Mar Holi 2023 : कान्हा की नगरी मथुरा और ब्रज क्षेत्र की होली सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में प्रसिद्ध है। यहां की होली देखने के लिए हर साल देश विदेश से लोग पहुंचते हैं। फुलेरा दूज से मथुरा में होली की शुरुआत होती है और इस दिन ब्रज में श्रीकृष्ण के साथ फूलों के संग होली खेली जाती है। इसके अलावा यहां लड्डू मार और लट्ठमार होली का अलग ही उत्साह देखने को मिलता है। लट्ठमार होली के दिन लट्ठ की मार खाकर लोग भी खुद को धन्य मानते हैं। ब्रज मंडल में वैसे तो लट्ठमार होली की मान्यता है, लेकिन गोकुल में छड़ीमार होली का आयोजन होता है। फाल्गुन माह में शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को गोकुल में प्रसिद्ध छड़ीमार होली खेली जाती है। आइए जानते हैं छड़ीमार होली की शुरुआत कब हुई और इसे मनाने के पीछे की परंपरा क्या है...  

Braj Ki Holi Chhadi Mar Holi 2023 kab hai date tradition Holi In Mathura Gokul
इस दिन मनाई जाएगी गोकुल में छड़ीमार होली, जानिए कैसे शुरू हुई ये अनूठी परंपरा - फोटो : अमर उजाला

कब मनाई जाएगी छड़ीमार होली 2023?
हर साल फाल्गुन शुक्ल की द्वादशी तिथि को छड़ीमार होली का आयोजन होता है। इस साल छड़ीमार होली 04 मार्च को मनाई जा रही है। 

Braj Ki Holi Chhadi Mar Holi 2023 kab hai date tradition Holi In Mathura Gokul
इस दिन मनाई जाएगी गोकुल में छड़ीमार होली, जानिए कैसे शुरू हुई ये अनूठी परंपरा - फोटो : अमर उजाला

छड़ीमार होली की परंपरा 
गोकुल में लाठी की जगह छड़ी से होली खेली जाती है। यहां छड़ीमार होली के दिन गोपियों के हाथ में लट्ठ नहीं, बल्कि छड़ी होती है और ये होली खेलने आए कान्हाओं पर छड़ी बरसाती हैं। दरअसल, बचपन में कान्हा बड़े चंचल हुआ करते थे। गोपियों को परेशान करने में उन्हें बड़ा आनंद मिलता था। इसलिए गोकुल में उनके बालस्वरूप को अधिक महत्व दिया जाता है। इसलिए नटखट कान्हा की याद में हर साल छड़ीमार होली का आयोजन किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि बालकृष्ण को लाठी से चोट न लग जाए, इसलिए यहां लाठी की जगह छड़ी से होली खेली जाती है।   

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इस दिन मनाई जाएगी गोकुल में छड़ीमार होली, जानिए कैसे शुरू हुई ये अनूठी परंपरा - फोटो : अमर उजाला

इस दिन कान्हा की पालकी और पीछे सजी-धजी गोपियां हाथों में छड़ी लेकर चलती हैं। गोकुल में छड़ीमार होली का उत्सव सदियों से चला आ रहा है। प्राचीन परंपराओं का निर्वहन करते हुए आज भी हर साल यहां छड़ी मार होली का आयोजन होता है। इस दिन गोकुल की छड़ी मार होली की शुरुआत यमुना किनारे स्थित नंदकिले के नंदभवन में ठाकुरजी के समक्ष राजभोग का भोग लगाकर होती है। 

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इस दिन मनाई जाएगी गोकुल में छड़ीमार होली, जानिए कैसे शुरू हुई ये अनूठी परंपरा - फोटो : अमर उजाला

परंपरा के अनुसार, हर साल होली खेलने वाली गोपियां 10 दिन पहले से छड़ीमार होली की तैयारियां शुरू कर देती हैं। यहां गोपियों को दूध, दही, मक्खन, लस्सी, काजू बादाम खिलाकर होली खेलने के लिए तैयार किया जाता है। छड़ीमार होली देखने के लिए दूर-दराज से श्रद्धालु आते हैं। 

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