फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को भक्ति भाव से आमलकी एकादशी के रूप में मनाया जाता है। इसे आंवला एकादशी और आमला एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस पावन दिन पर भगवान विष्णु की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है, साथ ही आंवले के पवित्र वृक्ष की भी श्रद्धा पूर्वक आराधना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन आंवले के जीवनदायी वृक्ष में स्वयं भगवान विष्णु का वास माना जाता है। क्या आप जानते हैं? आंवला केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि आरोग्य और आध्यात्मिक उन्नति के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह न केवल तन को पोषण देता है बल्कि मन को भी शुद्ध करता है।
Amalaki Ekadashi 2025: इस बार आमलकी एकादशी पर तीन शुभ संयोग का मिलेगा लाभ, जानें सही पूजा विधि और समय
Amalaki Ekadshi Vrat Kab Hai: इस शुभ दिन पर भगवान विष्णु और आंवले के वृक्ष की पूजा करने से पुण्य की प्राप्ति होती है, समस्त पापों का नाश होता है, और जीवन में सुख, समृद्धि व मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। इस वर्ष यह 10 मार्च 2025, सोमवार को पड़ेगी।
व्रत पारण का शुभ मुहूर्त:
11 मार्च 2025, मंगलवार को सुबह 6:35 बजे से 8:13 बजे तक।
आमलकी एकादशी का महत्व:
यह एकादशी अत्यंत पुण्यकारी मानी जाती है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस दिन व्रत करने से सैकड़ों तीर्थयात्राओं और यज्ञों के बराबर पुण्य प्राप्त होता है। भगवान विष्णु की आराधना करने से पापों का नाश होता है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। जीवन में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। मानसिक और आध्यात्मिक शांति की प्राप्ति होती है।
- भगवान विष्णु की पूजा करें – तुलसी, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
- आंवले के पेड़ की विशेष पूजा करें – यह वृक्ष विष्णु जी को अत्यंत प्रिय है।
- भगवान शिव और माता पार्वती का विशेष श्रृंगार करें और उन्हें रंग, अबीर, गुलाल अर्पित करें।
- रात्रि जागरण करें और भजन-कीर्तन का आयोजन करें।
- दान-पुण्य करें – जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र और धन का दान करें।
रंगभरी एकादशी का विशेष महत्त्व:
आमलकी एकादशी को रंगभरी एकादशी भी कहा जाता है, क्योंकि इसी दिन से होली के रंगों का उत्सव आरंभ होता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह के बाद उनके प्रथम आगमन की खुशी में भव्य आयोजन होता है। भक्तगण अबीर-गुलाल उड़ाकर, भजन-कीर्तन करके और उल्लास से नृत्य करके इस पर्व को धूमधाम से मनाते हैं।
व्रत के फल और लाभ:
- भगवान विष्णु की कृपा से पापों का नाश और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
- सुख-समृद्धि और सकारात्मकता का संचार होता है।
- घर-परिवार में शांति और उन्नति बनी रहती है।
भगवान विष्णु की होती है विशेष कृपा
आमलकी एकादशी का व्रत और पूजा विधि अपनाने से भगवान विष्णु और भगवान शिव दोनों की कृपा प्राप्त होती है। यह व्रत न केवल आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है, बल्कि मन, मस्तिष्क और आत्मा को शुद्ध करता है। इस पावन अवसर पर भक्ति, प्रेम और उल्लास के रंगों में सराबोर होकर भगवान की कृपा प्राप्त करें।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।