Pitru Paksha 2025: पितृपक्ष में क्यों जरूरी है पितरों का श्राद्ध ? जानें महत्व और नियम
Pitru Paksha 2025: ब्रह्म पुराण के अनुसार, श्राद्ध न करने से पितृगणों को दुख तो होता ही है, साथ में श्राद्ध न करने वालों को भी कष्टों का सामना करना पड़ता है।
श्राद्ध न कुरुते मोहात तस्य रक्तं पिबन्ति ते।
पितृस्तस्य शापं दत्वा प्रदान्तिच।।
अर्थात जो व्यक्ति पूर्वजों का श्राद्ध नहीं करते, पितृ उनका ही रक्तपान करके चल देते हैं। साथ ही श्राद्ध भाग न पाने पर पितृ श्राप देकर वापस अपने लोक चले जाते हैं। वहीं श्राद्ध से तुष्ट होकर पितृगण श्राद्धकर्ता को आरोग्यता समेत कई आशीर्वाद देते हैं।
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सार तत्व ग्रहण करते हैं पितर
प्रायः लोग शंका करते हैं कि आखिर श्राद्ध की वस्तुए पितरों तक पहुंचती कैसे हैं? इस शंका का समाधान यह है कि देवता और पितर स्थूल भोजन प्राप्त न कर केवल सार तत्व ही ग्रहण करते हैं। जिस प्रकार मनुष्यों का आहार अन्न है, पशुओं का आहार घास है, वैसे ही पितरों का आहार अन्न के सार तत्व हैं। पितरों के नाम, गोत्र और स्वधा शब्द के उच्चारण के साथ की गई अन्न, आहुति और ब्राह्मण भोज सूक्ष्म अंश में सूर्य लोक पहुंचते हैं और वहां से अभीष्ट पितरों के पास। वे जिस भी योनि में हों और जिस प्रकार के आहार के योग्य होते हैं, वैसे ही रूप में पहुंचकर उन्हें तृप्त करते हैं।
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- तर्पण पितरों के निमित्त सारी क्रियाएं- जनेऊ को दाहिने कंधे पर रखकर, भावपूर्वक दक्षिण मुख होकर काले तिल मिश्रित जल से किया जाता है।
- सात्विक श्राद्ध भोजन में चावल, दूध, शक्कर और घी से बने पदार्थ, गंगा जल, शहद और खीर पितरों के लिए परम तृप्तिकारी होते हैं।
- तीन आहुतियां- ‘आग्नेश कव्यवाहनाय स्वाहा, सोमाय पितृभते स्वाहा और वैवस्वताय स्वाहा’ मंत्रों द्वारा दी जाती हैं। उसके बाद ब्राह्मणों को भोजन कराया जाता है। भोजन के बाद ब्राह्मण को दक्षिणा अवश्य देनी चाहिए।
- गाय, कुत्ता, कौवा, चींटी और देवताओं के लिए भी भोजन का कुछ भाग निकाला जाता है।
- यदि श्राद्धकर्ता ब्राह्मण को भोजन, दक्षिणादि देने में असमर्थ है तो वह ब्राह्मण को कच्चा धान्य एवं मुट्ठी भर तिल देकर भी श्राद्ध कर्म कर सकता है। इसमें भी असमर्थ होने पर गाय को चारा खिलाकर तथा पूर्वजों को नमस्कार करके क्षमायाचना कर ले।
- श्राद्धकर्ता को श्राद्ध के दिन एक समय भोजन, भूमि शयन एवं ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। इस दिन दातुन करना, पान खाना, मैथुन, तेल, उबटन लगाना आदि वर्जित माना गया है।
- श्राद्ध भोजन में लाल और काले रंग के फूल, केवड़ा, बेल पत्र, उड़द, मसूर, अरहर, गाजर, लौकी, बैंगन, शलगम, प्याज, हींग, लहसुन, जीरा, पीली सरसों आदि वस्तुओं का प्रयोग निषेध है।
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