पं. हर्ष उज्ज्वल
Pitru Paksha 2025: पितृपक्ष में भूलकर भी न करें ये काम, जानें क्या है श्राद्ध करने के नियम
Pitru Paksha 2025: श्राद्ध कर्म में शुद्धीकरण का विशेष महत्व है। ग्रंथों में श्राद्ध करने वालों के लिए कुछ नियम निर्धारित किए गए हैं, जिनमें कुछ स्थितियों को निषिद्ध बताया गया है।
लौह पात्रों का निषेध
सोना, चांदी कांसे, तांबे के पात्र उत्तम हैं, मगर श्राद्ध में लोहे के पात्र का उपयोग कदापि नहीं करना चाहिए। लौह पात्र में न भोजन करना चाहिए और न ही ब्राह्मण को कराना चाहिए। इनके स्थान पर पत्तल उपयोग की जा सकती है, लेकिन केले के पत्ते पर श्राद्ध भोजन निषिद्ध है। भोजनालय या पाकशाला में भी लोहे का बर्तन इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। आसन में लोहा किसी भी रूप में प्रयुक्त नहीं होना चाहिए। केवल शाक, फल आदि के काटने में लोहे का इस्तेमाल कर सकते हैं। मान्यता है कि लोहे के दर्शन मात्र से पितर लौट जाते हैं।
गंध भी है वर्जित
श्राद्ध में श्रीखंड, चंदन, खस, कर्पूर, सफेद चंदन ही पितृकार्य के लिए प्रशस्त हैं। कस्तूरी, रक्त-चंदन तथा गोरोचन आदि निषिद्ध हैं। श्राद्ध में कदंब, केवड़ा, मौलश्री, बेलपत्र, करवीर, गहरे रंग के फूल और तेज गंध वाले एवं गंधरहित फूल वर्जित माने गए हैं। अग्नि पर दूषित गुग्गुल, गोंद का चूरा या हवन में केवल घी डालना भी निषिद्ध है।
इन अन्न का न करें उपयोग
माना जाता है कि जिस भोजन में बाल और कीड़े पड़ गए हों, जिसे कुत्तों ने देख लिया हो, जो बासी एवं दुर्गंधित हो, ऐसे अन्न का श्राद्ध में उपयोग न करें।
बैंगन और मदिरा का त्याग
मान्यता है कि जिस अन्न पर पहने वस्त्र की हवा लग जाए, वह भी श्राद्ध में वर्जित है। मसूर, अरहर, गाजर, कुम्हड़ा, गोल लौकी, बैंगन, शलजम, हींग, प्याज, लहसुन, काला नमक, काला जीरा, सिंघाड़ा, जामुन, पिप्पली, सुपारी, कुलथी, कैथ, महुआ, अलसी, पीली सरसों, चना आदि वस्तुएं श्राद्ध में वर्जित हैं, इसलिए इनका इस्तेमाल श्राद्ध के दौरान न करें।
मांस-मांसाहार निषिद्ध
श्राद्ध में मांस देने वाला व्यक्ति मानो चंदन की लकड़ी जलाकर उसका कोयला बेचता है। वह तो वैसा मूर्ख है, जैसे कोई बालक अगाध कुएं में अपनी वस्तु डालकर फिर उसे पाने की इच्छा करता है। श्रीमद्भागवत में कहा गया है कि न तो कभी मांस खाना चाहिए, न श्राद्ध में देना चाहिए। सात्विक अन्न-फलों से पितरों की सर्वोत्तम तृप्ति होती है।
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