Masik Shivaratri 2026: हिंदू धर्म में सभी व्रतों का अपना अलग महत्व माना गया है। इन्हीं में मासिक शिवरात्रि भी एक खास व्रत है। मान्यता है कि, माता पार्वती सहित कई देवियों ने भी मासिक शिवरात्रि का व्रत रखा था। यह उपवास हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को रखा जाता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करने का विशेष महत्व बताया गया है। माना जाता है कि, महीने में एक बार आने वाली मासिक शिवरात्रि पर व्रत रखने और सच्चे मन से भगवान भोलेनाथ की पूजा करने से उनकी विशेष कृपा मिलती हैं और जीवन में भी सुख-समृद्धि बनी रहती है। ऐसे में आइए जानते हैं कि, सितंबर माह में यह उपवास कब रखा जाएगा।
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Masik Shivaratri 2026: 8 या 9 सितंबर कब है मासिक शिवरात्रि, जानें डेट और पूजा विधि
Wed, 02 Sep 2026 01:48 PM IST
मेघा कुमारी
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
Published by: मेघा कुमारी
Updated Wed, 02 Sep 2026 01:48 PM IST
सार
Masik Shivaratri 2026: मासिक शिवरात्रि का व्रत रखने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होने और जीवन की परेशानियां दूर होने की भी मान्यता है। इस दिन महादेव की पूजा करने पर जीवन में कई अन्य बदलाव भी दिखाई देते हैं।
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Masik Shivaratri 2026
- फोटो : अमर उजाला
Masik Shivaratri 2026
- फोटो : adobe
मासिक शिवरात्रि सितंबर 2026
- चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 9 सितंबर 2026, दोपहर 12 बजकर 31 मिनट से
- चतुर्दशी तिथि समाप्त: 10 सितंबर 2026, सुबह 10 बजकर 33 मिनट पर
- मासिक शिवरात्रि व्रत: 9 सितंबर 2026, बुधवार
Masik Shivaratri 2026
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मासिक शिवरात्रि पूजा विधि
- मासिक शिवरात्रि के दिन शिव मंदिर जाकर शिवलिंग का अभिषेक करें।
- शिवलिंग पर दूध, दही, घी और शहद अर्पित करें।
- इसके बाद भगवान शिव को फूल, बेलपत्र और भांग चढ़ाएं।
- दीपक और धूप जलाकर भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें।
- पूजा के दौरान मासिक शिवरात्रि की व्रत कथा का पाठ करें।
- अपनी मनोकामना का स्मरण करते हुए शिवलिंग पर अक्षत अर्पित करें।
- अंत में भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें और प्रसाद बांटें।
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Masik Shivaratri 2026
- फोटो : freepik
शिवजी की आरती : ॐ जय शिव ओंकारा
जय शिव ओंकारा ॐ जय शिव ओंकारा ।
ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥ ॐ जय शिव...॥
एकानन चतुरानन पंचानन राजे ।
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे ॥ ॐ जय शिव...॥
दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।
त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे ॥ ॐ जय शिव...॥
अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी ।
चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी ॥ ॐ जय शिव...॥
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे ।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥ ॐ जय शिव...॥
कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता ।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता ॥ ॐ जय शिव...॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका ।
प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका ॥ ॐ जय शिव...॥
काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी ।
नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी ॥ ॐ जय शिव...॥
त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे ।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे ॥ ॐ जय शिव...॥
जय शिव ओंकारा ॐ जय शिव ओंकारा ।
ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥ ॐ जय शिव...॥
एकानन चतुरानन पंचानन राजे ।
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे ॥ ॐ जय शिव...॥
दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।
त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे ॥ ॐ जय शिव...॥
अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी ।
चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी ॥ ॐ जय शिव...॥
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे ।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥ ॐ जय शिव...॥
कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता ।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता ॥ ॐ जय शिव...॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका ।
प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका ॥ ॐ जय शिव...॥
काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी ।
नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी ॥ ॐ जय शिव...॥
त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे ।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे ॥ ॐ जय शिव...॥
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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।