Aja Ekadashi 2026 Date: हर साल भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को अजा एकादशी का व्रत रखा जाता है। हिंदू धर्म में इस एकादशी का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। मान्यता है कि, इस दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा और ध्यान करने का विधान है। इस व्रत को रखने और भगवान विष्णु का स्मरण करने से मन को शांति मिलती हैं। साथ ही जीवन में सकारात्मकता का संचार भी होने लगता है। इसके अलावा अजा एकादशी पर कुछ सरल उपाय करने से व्यक्ति के जाने-अनजाने में किए गए पापों का क्षय भी कम होता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि सितंबर 2026 में अजा एकादशी का व्रत किस दिन रखा जाएगा और इस दिन पूजा का क्या महत्व है।
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कब है सितंबर माह की पहली एकादशी ? जानें डेट, महत्व और पूजा विधि
Mon, 31 Aug 2026 04:16 PM IST
मेघा कुमारी
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
Published by: मेघा कुमारी
Updated Mon, 31 Aug 2026 04:16 PM IST
सार
Aja Ekadashi 2026 Date: भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को अजा एकादशी का व्रत रखा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और ध्यान करने का विधान है। आइए जानते हैं कि, सितंबर में यह उपवास कब किया जाएगा।
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Aja Ekadashi 2026 Date
- फोटो : अमर उजाला AI
Aja Ekadashi 2026 Date
- फोटो : adobe
अजा एकादशी 2026
भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 6 सितंबर 2026 को शाम 7 बजकर 29 मिनट से होगी। इसका समापन 7 सितंबर 2026 को शाम 5 बजकर 3 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार, अजा एकादशी का व्रत 7 सितंबर 2026 को रखा जाएगा। वहीं, व्रत का पारण 8 सितंबर 2026 को सुबह 6 बजकर 2 मिनट से सुबह 8 बजकर 33 मिनट के बीच किया जा सकता है।
Aja Ekadashi 2026 Date
- फोटो : Amar Ujala
अजा एकादशी पूजा विधि
- अजा एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा करने के लिए सबसे पहले चौकी पर भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें।
- अब चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर भगवान को फूल, मिठाई, फल और पूजा सामग्री अर्पित करें।
- भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
- इसके बाद धूप-बत्ती और दीपक जलाकर भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करें।
- पूजा के दौरान विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। यह बेहद शुभ माना जाता है।
- अजा एकादशी की व्रत कथा का पाठ अवश्य करें।
- रात्रि में भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए जागरण करें।
- अगले दिन निर्धारित समय पर व्रत का पारण कर अपनी क्षमता के अनुसार दान करें।
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Aja Ekadashi 2026 Date
- फोटो : adobe
भगवान विष्णु की आरती
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे॥
जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का।
सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय...॥
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।
तुम बिनु और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ॐ जय...॥
तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी॥
पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय...॥
तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय...॥
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय...॥
दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय...॥
विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय...॥
तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।
तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा॥ ॐ जय...॥
जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय...॥
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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे॥
जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का।
सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय...॥
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।
तुम बिनु और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ॐ जय...॥
तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी॥
पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय...॥
तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय...॥
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय...॥
दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय...॥
विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय...॥
तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।
तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा॥ ॐ जय...॥
जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय...॥
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