महाशिवरात्रि 2020: मंदिर के गर्भगृह के बाहर शिवलिंग और आधी परिक्रमा क्यों? कुछ रोचक जानकारियां
भगवान शिव को कई नामों से पुकारा और पूजा जाता है। भगवान शिव को भोलेनाथ कहा जाता है। भोलेनाथ यानी जल्दी प्रसन्न होने वाले देव। भगवान शंकर की आराधना और उनको प्रसन्न करने के लिए विशेष साम्रगी की जरूरत नहीं होती है। भगवान शिव जल, पत्तियां और तरह -तरह के कंदमूल को अर्पित करने से ही जल्द प्रसन्न हो जाते हैं। बेलपत्र भगवान शिव को विशेषरूप से प्रिय होती है।
शिवलिंग की आधी परिक्रमा क्यों?
शिव मंदिर में भगवान भोलेनाथ के दर्शन और जल चढ़ाने के बाद लोग शिवलिंग की परिक्रमा करते हैं। शास्त्रों में शिवलिंग की आधी परिक्रमा करने के बारे में कहा गया है। शिवलिंग की परिक्रमा हमेशा जलाधारी के आगे निकले हुए भाग तक जाकर फिर विपरीत दिशा में लौट दूसरे सिरे तक आकर परिक्रमा पूरी करें। इसे शिवलिंग की आधी परिक्रमा भी कहा जाता है।
शिवलिंग मंदिर के बाहर क्यों ?
आपने देखा होगा सभी मंदिरों में शिवलिंग मंदिर के गर्भगृह में नहीं बल्कि बाहर होते हैं। भगवान शिव ऐसे अकेले देव हैं जो गर्भगृह में नहीं होते हैं। भगवान शिव अपने भक्तों का विशेष ध्याल रखते हैं उनके दर्शन दूर से ही सभी लोग जिसमें बच्चे, बूढ़े, आदमी और महिलाएं सभी कर सकते हैं। भगवान शिव थोड़े से जल चढ़ाने मात्र से ही प्रसन्न हो जाते हैं।
किसी भी शिव मंदिर में पहले हमें शिव के वाहन नंदी के दर्शन होते हैं। शिव मंदिर में नंदी का मुंह शिवलिंग की ओर होता है। आखिर नंदी शिवलिंग की ओर ही मुख करके क्यों बैठा होता है? नंदी शिवजी का वाहन है। नंदी की नजर अपने आराध्य की ओर हमेशा होती है। नंदी के बारे में यह भी माना जाता है कि यह पुरुषार्थ का प्रतीक है।