Janmashtami 2025: कृष्ण जन्माष्टमी का पावन पर्व पूरे भारत में उत्साह के साथ मनाया जाता है। माना जाता है कि इस दिन पूरी निष्ठा और नियमपूर्वक पूजा और व्रत करने से भगवान श्रीकृष्ण प्रसन्न होते हैं और भक्तों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। जन्माष्टमी का व्रत बेहद कठिन माना जाता है, क्योंकि इसमें पूरे दिन उपवास रखना होता है। इस दिन श्रद्धालु निर्जल या फलाहार व्रत कर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करते हैं। व्रत का समापन यानी पारण सही समय और विधि से करना आवश्यक होता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि वर्ष 2025 में जन्माष्टमी व्रत का पारण कब और कैसे करना चाहिए।
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Janmashtami 2025: कब किया जाएगा जन्माष्टमी व्रत का पारण? जानें सही समय और विधि
Sat, 16 Aug 2025 11:17 AM IST
ज्योति मेहरा
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: ज्योति मेहरा
Updated Sat, 16 Aug 2025 11:17 AM IST
सार
कृष्ण जन्माष्टमी व्रत का समापन यानी पारण सही समय और विधि से करना आवश्यक होता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि वर्ष 2025 में जन्माष्टमी व्रत का पारण कब और कैसे करना चाहिए।
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जन्माष्टमी व्रत के पारण का महत्व
- फोटो : अमर उजाला
जन्माष्टमी व्रत के पारण का महत्व
- फोटो : adobe stock
जन्माष्टमी व्रत के पारण का महत्व
धार्मिक परंपराओं के अनुसार यह व्रत श्रीकृष्ण जन्म के बाद ही खोला जाता है। मान्यता है कि व्रत तभी तोड़ना उचित है जब अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र दोनों समाप्त हो चुके हों। हालांकि कई बार यह योग एक साथ नहीं बन पाता, ऐसे में पंचांग के अनुसार पारण का समय तय करना चाहिए।
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Janmashtami 2025 पारण का शुभ समय
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पारण का शुभ समय
- कई श्रद्धालु रात 12 बजे भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव और पूजा के बाद व्रत खोल लेते हैं। यह तब उपयुक्त होता है जब अष्टमी तिथि अगले दिन सुबह तक रहती है।
- शास्त्रों में वर्णन है कि व्रत अष्टमी तिथि के समाप्त होने के बाद हीतोड़ना श्रेष्ठ है। साल 2025 में अष्टमी तिथि 16 अगस्त की रात 9:34 बजे समाप्त होगी। इस समय के बाद पारण किया जा सकता है।
- कुछ भक्त रोहिणी नक्षत्र के अंत के बाद व्रत खोलते हैं। 2025 में यह नक्षत्र 17 अगस्त की सुबह 4:38 बजे से शुरू होकर 18 अगस्त को सुबह 3:17 बजे समाप्त होगा।
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कृष्ण जन्माष्टमी 2025 पारण की विधि
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पारण की विधि
- व्रत खोलने से पहले भगवान श्रीकृष्ण की विधिवत पूजा, भोग और आरती करें।
- व्रत का समापन भगवान को अर्पित प्रसाद से करें। इसमें माखन-मिश्री, पंजीरी और फल शामिल हो सकते हैं।
- पारण के बाद केवल सात्त्विक भोजन ग्रहण करें, जिसमें प्याज, लहसुन या तामसिक पदार्थ न हों।
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पारण की विधि
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- व्रत खोलने के बाद अपनी क्षमता अनुसार दान-पुण्य अवश्य करें।
- पारण करते समय मन में लगातार कान्हा का स्मरण करते रहें।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।