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जन्माष्टमी: रात 12 बजे नहीं जा सकते मंदिर, तो कृष्ण जन्म के समय घर पर इस विधि से करें पूजा

Fri, 04 Sep 2026 06:17 AM IST
ज्योति मेहरा ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला Published by: ज्योति मेहरा Updated Fri, 04 Sep 2026 06:17 AM IST
सार

जन्माष्टमी के दिन भक्त पूरे श्रद्धाभाव से कान्हा की पूजा करते हैं और आधी रात को उनके जन्म का उत्सव मनाते हैं। हालांकि कई लोगों के लिए रात में मंदिर जाना संभव नहीं होता। ऐसे में आइए जानते हैं कि घर पर ही पूरे भक्तिभाव के साथ कृष्ण जन्मोत्सव कैसे मना सकते हैं।

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janmashtami 2026 ghar mein krishna janmotsav kaise manaye
जन्माष्टमी पर रात 12 बजे ऐसे करें कान्हा जी की पूजा - फोटो : AI

भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाने वाली जन्माष्टमी हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। इस दिन भक्त पूरे श्रद्धाभाव से कान्हा की पूजा करते हैं और आधी रात को उनके जन्म का उत्सव मनाते हैं। कई लोग इस मौके पर मंदिर जाकर भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन करते हैं, लेकिन छोटे बच्चों, बुजुर्गों, स्वास्थ्य संबंधी कारणों या किसी अन्य वजह से हर किसी के लिए रात में मंदिर जाना संभव नहीं होता। ऐसी स्थिति में घर पर ही पूरे भक्तिभाव के साथ कृष्ण जन्मोत्सव मनाया जा सकता है। इस साल जन्माष्टमी 4 सितंबर को है।



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आधी रात को करें बाल गोपाल की पूजा - फोटो : adobe stock

आधी रात को करें बाल गोपाल की पूजा
जन्माष्टमी की रात निशीथ काल में करीब 12 बजे पूजा की शुरुआत भगवान श्रीकृष्ण के ध्यान से करें। सबसे पहले घर के पूजा स्थल पर दीपक जलाएं और गणेश जी के साथ अपने इष्ट देव का स्मरण करें। इसके बाद बाल गोपाल का पंचामृत से अभिषेक करें। अभिषेक के बाद भगवान को साफ और सुंदर वस्त्र पहनाएं।

लड्डू गोपाल को मुकुट, मोरपंख, बांसुरी, चंदन, फूल और अन्य पूजा सामग्री से सजाएं। इसके बाद भगवान को अक्षत और तुलसी दल अर्पित करें। श्रद्धा के साथ मंत्रों का जाप करते हुए कान्हा का ध्यान करें।
 

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कृष्ण जन्म के समय बजाएं शंख और घंटी - फोटो : adobe stock

कृष्ण जन्म के समय बजाएं शंख और घंटी
आधी रात को भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का समय होने पर शंख और घंटी बजाकर जन्मोत्सव मनाने की परंपरा है। इसके बाद कान्हा की आरती करें और उन्हें माखन-मिश्री, पंजीरी, फल और अन्य सात्विक चीजों का भोग लगाएं। परिवार के सभी सदस्य मिलकर कृष्ण भजन और पारंपरिक जन्मोत्सव गीत गा सकते हैं। इससे घर का वातावरण भक्तिमय हो जाएगा।
 

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ऐसे सजाएं कान्हा की झांकी - फोटो : adobe stock

ऐसे सजाएं कान्हा की झांकी
घर में झांकी बनाने के लिए सबसे पहले पूजा स्थल या किसी साफ जगह की अच्छी तरह सफाई करें। एक छोटी चौकी पर पीला, लाल या सफेद कपड़ा बिछाकर बाल गोपाल को विराजमान करें। झांकी को सजाने के लिए पालना, झूला, मोरपंख, बांसुरी, फूल और छोटे मिट्टी के दीपक इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

अगर घर में पर्याप्त जगह है तो गोकुल या नंद भवन की थीम पर छोटा-सा दृश्य बनाया जा सकता है। इसके लिए मिट्टी की मटकियां, छोटे बर्तन, गाय-बछड़े की प्रतिमाएं और फूलों का इस्तेमाल करें। भगवान के जन्म के समय परिवार के सदस्य मिलकर पालना झुला सकते हैं।
 

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जन्माष्टमी पर खीरा काटने की परंपरा - फोटो : AI

जन्माष्टमी पर खीरा काटने की परंपरा
कुछ स्थानों पर जन्माष्टमी की पूजा में खीरा काटने की परंपरा भी निभाई जाती है। इसके लिए ताजा और बिना कटा हुआ खीरा लेकर उसे अच्छी तरह धोकर पूजा स्थल पर रखा जाता है। मान्यता के अनुसार, खीरे के ऊपरी हिस्से में छोटा-सा कट लगाकर उसमें बाल कृष्ण की छोटी प्रतिमा या लड्डू गोपाल के प्रतीक को रखा जाता है।

निशीथ काल में कृष्ण जन्म के समय मंत्र, भजन और आरती के साथ खीरा काटने की रस्म निभाई जाती है। कई जगह इसे भगवान श्रीकृष्ण के जन्म और कारागार से उनके प्राकट्य के प्रतीक के तौर पर देखा जाता है। इसके बाद कान्हा को माखन-मिश्री, फल आदि का भोग लगाएं और परिवार के साथ प्रसाद ग्रहण करें।

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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