हिंदू धर्म में भगवान श्रीकृष्ण के विभिन्न स्वरूपों की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। घर के मंदिरों में भी कान्हा की अलग-अलग रूपों वाली तस्वीरें और प्रतिमाएं देखने को मिलती हैं। कोई उन्हें बांसुरी बजाते किशोर रूप में पूजता है तो कई घरों में बाल गोपाल की प्रतिमा विराजमान होती है। हालांकि, भगवान के हर स्वरूप से जुड़ी अलग धार्मिक मान्यताएं हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि घर के मंदिर में श्रीकृष्ण का कौन सा रूप स्थापित करना उचित माना जाता है और उनकी पूजा कैसे करनी चाहिए।
घर के मंदिर में श्रीकृष्ण के कौन से स्वरूप की करनी चाहिए पूजा? जानें क्या कहते हैं नियम
हिंदू परंपरा में भगवान श्रीकृष्ण के विभिन्न स्वरूपों की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। ऐसे में आइए जानते हैं कि घर के मंदिर में श्रीकृष्ण का कौन सा रूप स्थापित करना उचित माना जाता है और उनकी पूजा कैसे करनी चाहिए।
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अलग-अलग रूपों में होती है कान्हा की पूजा
विभिन्न संप्रदायों और परंपराओं में भगवान श्रीकृष्ण के अलग-अलग स्वरूपों की आराधना की जाती है। कई जगह किशोर कृष्ण की पूजा का विधान है, जिसमें कान्हा हाथ में बांसुरी लिए दिखाई देते हैं। इस रूप में कई प्रतिमाओं या चित्रों में भगवान के साथ गाय भी नजर आती है।
इसके अलावा श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप यानी बाल गोपाल की पूजा भी काफी प्रचलित है। घर में श्रीकृष्ण की प्रतिमा स्थापित करने की बात करें तो लड्डू गोपाल का स्वरूप विशेष रूप से शुभ माना जाता है। सामान्य गृहस्थ भी इस स्वरूप की श्रद्धापूर्वक आराधना कर सकते हैं।
लड्डू गोपाल की बच्चे की तरह करें सेवा
घर में बाल गोपाल की स्थापना के बाद भक्त उनकी सेवा एक छोटे बच्चे के समान करते हैं। उन्हें परिवार का सदस्य मानकर उनके स्नान, वस्त्र, भोग और विश्राम का ध्यान रखा जाता है। इसी वजह से कई भक्त लड्डू गोपाल को अपने घर के बच्चे की तरह मानते हैं और बाहर जाते समय उन्हें साथ भी ले जाते हैं।
रोजाना पूजा करना माना जाता है जरूरी
यदि घर में लड्डू गोपाल की स्थापना की गई है तो उनकी नियमित पूजा और सेवा भी करनी चाहिए। पूजा के दौरान उन्हें दूध, गंगाजल और पंचामृत से स्नान कराया जाता है। इसके बाद साफ वस्त्र पहनाकर उन्हें आसन पर विराजमान करें और धूप, दीप व अगरबत्ती अर्पित करें।
पूजा के बाद भगवान को सात्विक भोग लगाना चाहिए। खासतौर पर बाल गोपाल को माखन अर्पित करना शुभ माना जाता है, क्योंकि श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप का माखन से विशेष संबंध रहा है।
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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।