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Ganesh Chaturthi 2020: गणपति बप्पा के शरीर के अंग हमें देते हैं ये सीख

Sat, 22 Aug 2020 12:16 AM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: रुस्तम राणा Updated Sat, 22 Aug 2020 12:16 AM IST
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Ganesh Chaturthi 2020 Lord Ganesh teaches us in this way
गणेश चतुर्थी 2020 - फोटो : SELF

गणपति महाराज का जन्मोत्सव भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। इस बार यह तिथि 22 अगस्त को पड़ रही है। गणपति महाराज सभी देवों में सर्वप्रथम पूजनीय हैं। शास्त्रों में उन्हें बुद्धि का देवता माना गया है। उनका शरीर भी अन्य देवताओं की तुलना भिन्न है। उनका शरीर का धड़ जहां इंसान का है तो वहीं सिर हाथी का है। लेकिन उनके शरीर का हर अंग हमें किसी न किसी रूप में सीख प्रदान करता है। जैसे-

Ganesh Chaturthi 2020 Lord Ganesh teaches us in this way
गणेश चतुर्थी 2020 - फोटो : अमर उजाला

गणपति महाराज की सूंड
गणेश जी की सूंड हमेशा हिलती डुलती रहती है जो उनके हर पल सक्रिय रहने का संकेत है। यह हमें ज्ञान देती है कि जीवन में सदैव सक्रिय रहना चाहिए। जो व्यक्ति ऐसा करता है उसे कभी दुखः और गरीबी का सामना नहीं करना पड़ता है। शास्त्रों में गणेश जी की सूंड की दिशा का भी अलग-अलग महत्व बताया गया है। मान्यता है कि जो व्यक्ति सुख-समृद्वि चाहते हो उन्हें दायीं ओर सूंड वाले गणेश की पूजा करनी चाहिए। शत्रु को परास्त करने एवं ऐश्वर्य पाने के लिए बायीं ओर मुड़ी सूंड वाले गणेश की पूजा लाभप्रद होती है।

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गणेश महोत्सव 2020 - फोटो : सोशल मीडिया
गणपति महाराज का बड़ा उदर
गणेश जी का पेट बहुत बड़ा है। इसी कारण इन्हें लंबोदर भी कहा जाता है। लंबोदर होने का कारण यह है कि वे हर अच्छी और बुरी बात को पचा जाते हैं और किसी भी बात का निर्णय सूझबूझ के साथ लेते हैं। अंग विज्ञान के अनुसार बड़ा उदर खुशहाली का प्रतीक होता है। गणेश जी का बड़ा पेट हमें यह ज्ञान देता है कि भोजन के साथ ही साथ बातों को भी पचना सीखें। जो व्यक्ति ऐसा कर लेता है वह हमेशा ही खुशहाल रहता है।
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भगवान गणेश - फोटो : सोशल मीडिया

एकदंत
बाल्यकाल में भगवान गणेश का परशुराम जी से युद्घ हुआ था। इस युद्घ में परशुराम ने अपने फरसे से भगवान गणेश का एक दांत काट दिया। इस समय से ही गणेश जी एकदंत कहलाने लगे। गणेश जी ने अपने टूटे हुए दांत को लेखनी बना लिया और इससे पूरा महाभारत ग्रंथ लिख डाला। गणेश जी अपने टूटे हुए दांत से यह सीख देते हैं कि चीजों का सदुपयोग किस प्रकार से किया जाना चाहिए।

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