गणेश चतुर्थी का त्योहार भादो मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी के दिन मनाया जाता है। लोग हर्षोल्लास के साथ गणेश उत्सव मनाते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन गणपति बप्पा का जन्म हुआ था। इस दिन लोग ढोल नगाड़ों के साथ धूमधाम से गणपति जी को अपने घर लेकर आते हैं। गणेश चतुर्थी से लेकर यह उत्सव पूरे ग्यारह दिन तक चलता है। दस दिनों तक बप्पा का विधि-विधान के साथ पूजन किया जाता है, ग्यारहवें दिन धूमधाम के साथ "गणपति बप्पा मोरिया अगले बरस तू जल्दी आना" के जयकारों के साथ गणेश जी को विसर्जित कर दिया जाता है।
गणेश चतुर्थी 2020: जानिए तिथि, शुभ मुहूर्त से लेकर हर एक जानकारी
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गणेश चतुर्थी का महत्व
गणेश जी को बुद्धि का देवता माना गया है। उन्हें विघ्नहर्ता भी कहा जाता है। जो लोग गणेश जी को चतुर्थी के दिन अपने घर लाकर पूरे गणेश उत्सव के दिनों में सच्चे दिल और भक्ति भाव के साथ बप्पा की पूजा करते हैं, बप्पा उनकी हर मनोकामना पूर्ण करते हैं। हर कार्य में आने वाले विघ्नों को दूर करते हैं, और बुद्धि का आशीर्वाद देते हैं। आगे जानिए तिथि, शुभ मुहूर्त और अन्य जानकारी..
गणेश चतुर्थी का शुभ मुहूर्त
इस बार गणेश चतुर्थी का उत्सव 22 अगस्त शनिवार के दिन मनाया जाएगा। यह उत्सव पूरे दस दिनों तक चलेगा। बप्पा का विसर्जन ग्यारहवें दिन यानि 1 सितंबर अनंत चतुर्दशी के दिन किया जाएगा।लोग अपनी क्षमता के अनुसार 5, 7, या 9 दिनों में भी बप्पा का विसर्जन करते हैं। गणेश चतुर्थी का आरंभ 21 अगस्त की रात 11.02 बजे से हो जाएगा। 22 अगस्त को शाम 7:57 बजे तक चतुर्थी तिथि रहेगी। वैसे तो पूजा के लिए सुबह का समय सही रहता है लेकिन कहा जाता है कि बप्पा ने दोपहर के समय जन्म लिया था, इसलिए चतुर्थी के दिन गणेश जी का पूजन दिन के समय किया जाता है। इस बार पूजा का समय 22 अगस्त को सुबह 10:46 मिनट से लेकर दोपहर 1:42 मिनट तक रहेगा।
गणेश उत्सव की धूम वैसे तो पूरे देश में होती है लेकिन सबसे ज्यादा इस उत्सव को महाराष्ट्र में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। कथा के अनुसार छत्रपति शिवाजी ने लोगों के दिलों में देशभक्ति की भावना को जागृत करने के लिए इस उत्सव की शुरुआत की थी। इसलिए महाराष्ट्र में यह उत्सव बहुत जोर-शोर के साथ मनाया जाता है। मुंबई में जगह-जगह भव्य पंडाल लगाए जाते हैं। यहां के 'लालबाग चा राजा' पंडाल दुनिया भर में मशहूर है। यह पंडाल सन् 1934 से लगाया जा रहा है। गणेशजी को सभी देवों प्रथम पूजनीय माना गया है। हर कार्य की शुरुआत से पहले बप्पा की आराधना की जाती है जिससे सारे कार्य बिना विघ्न के संपन्न हो जाते हैं।