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Dussehra 2025: श्रवण नक्षत्र और रवि योग में मनाया जायेगा विजयादशमी का पर्व, जानें महत्व और मुहूर्त

Wed, 01 Oct 2025 04:40 PM IST
ज्योति मेहरा पं. मनोज कुमार द्विवेदी ज्योतिषाचार्य
पं. मनोज कुमार द्विवेदी ज्योतिषाचार्य Published by: ज्योति मेहरा Updated Wed, 01 Oct 2025 04:40 PM IST
सार

दशहरा का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इस दिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने लंकापति रावण का वध किया था। इस पर्व को विजय दशमी भी कहा जाता है। इस दिन मां दुर्गा ने महिषासुर का संहार भी किया था।

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Dussehra 2025 Shravan Nakshatra and Ravi Yoga on Vijayadashami muhurat
विजयादशमी पर बन रहे हैं शुभ संयोग - फोटो : Amar Ujala

Dussehra 2025: विजयादशमी या दशहरा के दिन श्री राम, मां दुर्गा, श्री गणेश और हनुमान जी की आराधना करके परिवार के मंगल की कामना की जाती है। मान्यता है कि दशहरा के दिन रामायण पाठ, सुंदरकांड, श्री राम रक्षा स्त्रोत करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। विजयदशमी के दिन शस्त्र पूजन किया जाता है। इसके अतिरिक्त इस दिन बहुत से शुभ कार्य, जैसे बच्चे का अक्षरारंभ, नया व्यवसाय का आरंभ नई फसलों के बीज बोना आदि शुरू किये जाते हैं। कहा जाता है इस दिन जिस भी कार्य का प्रारंभ किया जाता है उसमे सफलता अवश्य मिलती है।


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दशहरा का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इस दिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने लंकापति रावण का वध किया था। रावण के बढ़ते अत्याचार और अंहकार के कारण भगवान विष्णु ने राम के रूप में अवतार लिया और रावण का वध कर पृथ्वी को रावण के अत्याचारों से मुक्त कराया। रावण पर विजय प्राप्त करने के उपलक्ष्य में दशहरा का पर्व मनाया जाता है। इस पर्व को विजय दशमी भी कहा जाता है। इस दिन मां दुर्गा ने महिषासुर का संहार भी किया था।

Dussehra 2025 Shravan Nakshatra and Ravi Yoga on Vijayadashami muhurat
दशहरा पूजा का महत्व - फोटो : Adobe Stock

दशहरा पूजा का महत्व
दशहरा के दिन मां दुर्गा और भगवान श्रीराम की पूजा की जाती है। मां दुर्गा जहां शक्ति की प्रतीक हैं वहीं भगवान राम मर्यादा, धर्म और आदर्श व्यक्तित्व के प्रतीक हैं। जीवन में शक्ति, मर्यादा, धर्म और आदर्श का विशेष महत्व है। जिस व्यक्ति के भीतर ये गुण हैं वह सफलता को प्राप्त करता है। श्री राम का संपूर्ण जीवन हमें आदर्श और मर्यादा की शिक्षा देता है कि हर व्यक्ति के जीवन में सुख-दुख तो आते-जाते रहेंगे क्योकि यह तो सृष्टि का अटल नियम है। लेकिन हमें अपना जीवन सब परेशानियों के होते हुए भी हिम्मत और आशा के साथ जीना है बल्कि इस जीवन को ईश्वर की देन समझ कर अपने जीवन को सार्थक बनाना है। 

श्री राम और रावण दोनों ही शिव के उपासक थे लेकिन दोनों की व्याख्या अलग-अलग है क्योंकि रावण की साधना और भक्ति स्वार्थ, मान, सत्ता, भोग-विलास और समाज को दुख देने हेतु थी जबकि श्री राम की साधना परोपकार, न्याय, मर्यादा, शांति, सत्य और समाज कल्याण के उद्देश्य हेतु थी तभी तो इतने वर्षों बाद आज भी हम श्री राम की जय से रावण के पुतले का अंत करते है।

Dussehra 2025 Shravan Nakshatra and Ravi Yoga on Vijayadashami muhurat
विजयादशमी मुहूर्त  - फोटो : adobe stock

विजयादशमी मुहूर्त 
दशमी तिथि का प्रारंभ 1 अक्तूबर बुधवार, सायंकाल 7:02 बजे होगा और दशमी तिथि की समाप्ति 2 अक्तूबर गुरुवार, सायंकाल 7:10 बजे होगी। इसलिए विजयादशमी का पर्व 2 अक्तूबर गुरुवार को मनाया जाएगा।
विजय मुहूर्त- गुरुवार को दोपहर 1:56 बजे से दोपहर 2:44 बजे तक रहेगा। 
अपराह्न पूजा मुहूर्त- 2 अक्तूबर दोपहर 1 बजकर 9 मिनट बजे से 3:31 बजे तक होगा।

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विजयादशमी मुहूर्त  - फोटो : adobe stock
2 अक्तूबर गुरुवार को दशहरा के दिन रवि योग भी रहेगा। रवि योग दशहरा को पूरे दिन रहेगा। रवि योग में सभी प्रकार के दोष दूर होंगे किए गए कार्य सफल होने की उम्मीद अधिक रहेगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विजयादशमी के दिन श्रवण नक्षत्र का होना बहुत शुभ होता है और इस साल इसका संयोग बन रहा है।

श्रवण नक्षत्र 2 अक्तूबर को सुबह 9:14 बजे से प्रारंभ होकर 3 अक्तूबर को सुबह 9:34 बजे पर समाप्त हो रहा है।श्रवण नक्षत्र विजयादशमी के दिन बहुत शुभ माना जाता है, क्योंकि दशमी तिथि और श्रवण नक्षत्र के योग से ही दशहरा मनाए जाने की परंपरा है।दशमी तिथि और श्रवण नक्षत्र का एक साथ होना विजयादशमी के पर्व को अत्यंत शुभ और कल्याणकारी बनाता है। और यह संयोग ही दशहरा मनाने का शास्त्रीय आधार है। 

 
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विजया दशमी क्या हैं परम्परा - फोटो : freepik.com
विजया दशमी क्या हैं परम्परा
विजय का सूचक है पान

दशहरा के दिन रावण, कुम्भकर्ण और मेघनाद  दहन के पश्चात पान का बीणा खाना सत्य की जीत की ख़ुशी को व्यक्त करता है। इस दिन हनुमानजी को मीठी बूंदी का भोग लगाने बाद उन्हें पान अर्पित करके उनका आशीर्वाद लेने का महत्व है। विजयादशमी पर पान खाना, खिलाना मान-सम्मान, प्रेम एवं विजय का सूचक माना जाता है।
 
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