Pitru Paksha 2025 : पूर्वजों की आत्मशांति और उन्हें प्रसन्न करने के लिए पितृपक्ष का समय श्रेष्ठ है। शास्त्रों के अनुसार, इस अवधि में सभी पितर स्वर्गलोक से धरती लोक में आते हैं और अपने वंशों को आशीर्वाद देते हैं, इसलिए श्रद्धापूर्वक पिंडदान, तर्पण, श्राद्ध और दान जैसे शुभ कार्य किए जाते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से न केवल पितरों की आत्मा तृप्त होती है बल्कि परिवार में भी सुख-समृद्धि वास करती है। साथ ही परिवार पितृदोष से मुक्त रहता है।
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Pitru Paksha 2025: पितृपक्ष में अवश्य करें इन मंत्रों का जाप, पूर्वजों की बरसेगी विशेष कृपा
Mon, 15 Sep 2025 01:09 PM IST
मेघा कुमारी
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
Published by: मेघा कुमारी
Updated Mon, 15 Sep 2025 01:09 PM IST
सार
Pitru Paksha 2025 : पूर्वजों की आत्मशांति और उन्हें प्रसन्न करने के लिए पितृपक्ष का समय श्रेष्ठ है। शास्त्रों के अनुसार, इस अवधि में सभी पितर स्वर्गलोक से धरती लोक में आते हैं और अपने वंशों को आशीर्वाद देते हैं, इसलिए श्रद्धापूर्वक पिंडदान, तर्पण, श्राद्ध और दान जैसे शुभ कार्य किए जाते हैं।
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Pitru Paksha 2025
- फोटो : adobe stock
Pitru Paksha 2025
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पितृपक्ष 2025
पंचांग के मुताबिक हर साल पितृपक्ष भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा से शुरू होता है और आश्विन अमावस्या तक रहते हैं। इस साल श्राद्ध 7 सितंबर 2025 से शुरू हो चुके हैं और 21 सितंबर तक रहने वाले हैं।
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पितृ तर्पण मंत्र
ॐ पितृभ्यः स्वधा नमः।
पितृ शांति मंत्र
ॐ त्र्यंबकं यजामहे सुगंधिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
ॐ पितृभ्यः स्वधा नमः।
पितृ शांति मंत्र
ॐ त्र्यंबकं यजामहे सुगंधिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
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Pitru Paksha 2025
- फोटो : amar ujala
श्राद्ध मंत्र
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः।
पितृ दोष निवारण मंत्र
ॐ सर्व पितृ देवताभ्यो नमः।
गायत्री पितृ दोष निवारण मंत्र
ॐ देवताभ्यः पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च।
नमः स्वाहायै स्वधायै नित्यमेव नमो नमः।
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः।
पितृ दोष निवारण मंत्र
ॐ सर्व पितृ देवताभ्यो नमः।
गायत्री पितृ दोष निवारण मंत्र
ॐ देवताभ्यः पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च।
नमः स्वाहायै स्वधायै नित्यमेव नमो नमः।
Pitru Paksha 2025: पितृपक्ष में इन नियमों का अवश्य करें पालन, पितरों की बरसेगी कृपा
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- फोटो : अमर उजाला
पितृ स्तोत्रं पाठ
अर्चितानाममूर्तानां पितृणां दीप्ततेजसाम् ।
नमस्यामि सदा तेषां ध्यानिनां दिव्यचक्षुषाम् ॥
इन्द्रादीनां च नेतारो दक्षमारीचयोस्तथा ।
सप्तर्षीणां तथान्येषां तान् नमस्यामि कामदान् ॥
मन्वादीनां मुनीन्द्राणां सूर्याचन्द्रमसोस्तथा ।
तान् नमस्याम्यहं सर्वान् पितृनप्सूदधावपि ॥
नक्षत्राणां ग्रहाणां च वाय्वग्न्योर्नभसस्तथा।
द्यावापृथिवोव्योश्च तथा नमस्यामि कृताञ्जलि: ॥
देवर्षीणां जनितृंश्च सर्वलोकनमस्कृतान् ।
अक्षय्यस्य सदा दातृन् नमस्येsहं कृताञ्जलि: ॥
प्रजापते: कश्यपाय सोमाय वरुणाय च ।
योगेश्वरेभ्यश्च सदा नमस्यामि कृताञ्जलि: ॥
नमो गणेभ्य: सप्तभ्यस्तथा लोकेषु सप्तसु ।
स्वयम्भुवे नमस्यामि ब्रह्मणे योगचक्षुषे ॥
सोमाधारान् पितृगणान् योगमूर्तिधरांस्तथा ।
नमस्यामि तथा सोमं पितरं जगतामहम् ॥
अग्रिरूपांस्तथैवान्यान् नमस्यामि पितृनहम् ।
अग्नीषोममयं विश्वं यत एतदशेषत: ॥
ये तु तेजसि ये चैते सोमसूर्याग्निमूर्तय:।
जगत्स्वरूपिणश्चैव तथा ब्रह्मस्वरूपिण: ॥
तेभ्योsखिलेभ्यो योगिभ्य: पितृभ्यो यतमानस:।
नमो नमो नमस्ते मे प्रसीदन्तु स्वधाभुज: ॥
॥ इति पितृ स्त्रोत समाप्त ॥
Pitru Paksha 2025: पितृपक्ष में क्यों जरूरी है पितरों का श्राद्ध ? जानें महत्व और नियम
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।