कोरोना संकट में भी शिक्षा की अलख जगाए रखने वाले शिक्षकों को शिक्षक दिवस के अवसर पर पांच सितंबर को सम्मानित किया जाएगा। शिक्षा क्षेत्र में बेहतरीन कार्य करने वाले 17 शिक्षकों का सरकार ने राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चयन किया है। कुछ शिक्षकों ने कोरोना संकट में विद्यार्थियों की पढ़ाई को सुचारु चलाए रखने के लिए किताबों को घरों तक पहुंचाया। कुछ ने गूगल मीट और जूम एप से ऑनलाइन पढ़ाई करवाई। कुछ शिक्षकों ने स्कूलों में आकर स्मार्ट क्लासरूम से पढ़ाई को जारी रखा।
हिमाचल: इन 17 शिक्षकों ने कोरोना संकट में भी जगाए रखी शिक्षा की अलख, बने मिसाल
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स्कूल में नौ से 58 पहुंचाई बच्चों की संख्या
प्राइमरी स्कूल केलांग में तैनात छिमे अंगमो का नाम राज्य स्तरीय शिक्षक अवार्ड के लिए चयनित हुआ है। पांच सितंबर को शिमला में राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर उन्हें सम्मानित करेंगे। छिमे अंगमो ने जनवरी 2017 में ज्वाइनिंग दी थी तो स्कूल में महज नौ बच्चे थे। उसी साल अप्रैल माह में यह संख्या 12 पहुंची। अब उनकी पाठशाला में प्री प्राइमरी से पांचवीं तक बच्चों की संख्या 58 हो गई है। कई प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों ने छिमे अंगमो के स्कूल में दाखिला लिया है। खंड शिक्षा अधिकारी किशन कुमार ने कहा कि छिमे अंगमो का कार्य सराहनीय है।
कुछ हटकर करवाया, बच्चों ने खेल में भी नाम कमाया
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बसाल (ऊना) के कला अध्यापक सुभाष चंद की परीक्षा का परिणाम हमेशा सर्वश्रेष्ठ रहा है। उन्होंने वॉलीबाल खिलाड़ी भी तैयार किए, जो राज्य स्तर पर बेहतरीन प्रदर्शन कर चुके हैं। करीब एक दशक से वह मिड-डे मील का कार्य सुचारु रूप से चला रहे हैं। विद्यालय परिसर को भी उन्होंने विभिन्न माध्यमों से संवारा है। सुभाष चंद ने कहा कि उनका प्रयास रहता है कि वह विद्यार्थियों के लिए हटकर करें और उन्हें पढ़ाई भी रोचकता के साथ करवाएं।
कोरोना काल में पढ़ाई के साथ बच्चों को योग भी करवाया
प्राथमिक पाठशाला बलग का घाट के अध्यापक संजीव शर्मा ने कोरोना काल में बच्चों की ऑनलाइन कक्षाएं लगातार लगाईं। साथ ही बच्चों की शारीरिक गतिविधियों का भी ख्याल रखा। इसके लिए ऑनलाइन योग की कक्षाएं लगवाईं। कोरोना काल में भी इनके स्कूल में बच्चों की संख्या में इजाफा हुआ। स्कूल में पहली से पांचवीं तक 57 बच्चे पढ़ रहे हैं। स्कूल में बच्चे प्रोजेक्टर, ग्रीन बोर्ड, व्हाइट बोर्ड और स्मार्ट बोर्ड पर पढ़ाई करते हैं। इनका स्कूल बड़ी सुविधाओं वाले निजी स्कूल से कम नहीं है।
स्मार्ट क्लास रूम बनाए, बच्चों को दिए जूते-स्वेटर
पच्छाद के गलानाघाट स्कूल में कॉमर्स प्रवक्ता विवेक कौशिक जिस भी स्कूल में गए, वहां स्मार्ट क्लास रूम बनाए। चप्पल में आने वाले बच्चों के लिए डोनेशन से जूते खरीदे। सर्दियों के मौसम में बच्चों को स्वेटर भी किए। राज्य, जिला स्तर पर होने वाली कार्यशालाओं में शिक्षकों को ट्रेनिंग भी दी। जेबीटी पद पर रहते मोगीनंद, भूड़ और निहोग प्राथमिक विद्यालयों में स्मार्ट कक्षाएं शुरू करवाईं। प्राथमिक स्कूलों में वार्षिक समारोह आयोजित कराने का श्रेय भी विवेक को मिला। जिस स्कूल में भी सेवाएं दीं, वहां वार्षिक परिणाम 85 फीसदी से अधिक रहा।