दसवीं और 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाओं में कम परिणाम देने वाले शिक्षकों पर अब कार्रवाई नहीं होगी। कॉलेजों की तर्ज पर स्कूलों में भी शिक्षा निदेशालय नया प्रयोग करने जा रहा है। इसके तहत शिक्षकों को उनकी जिम्मेवारियों को बिना किसी डर या दबाव के निभाने का पाठ पढ़ाया जाएगा।
इसके लिए निदेशालय ने शिक्षकों की सालाना गतिविधियों के लिए शेड्यूल भी तय कर दिया है। अब हर सरकारी स्कूल में पंद्रह दिन में बच्चों के टेस्ट लिए जाएंगे। वर्ग वार ही छात्र मूल्यांकन किया जाएगा। उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमरजीत कुमार शर्मा ने इसकी पुष्टि की है।
पूअर रिजल्ट पॉलिसी के तहत कम परिणाम देने वाले शिक्षकों की इंक्रीमेंट रोकने और एसीआर में इसका उल्लेख करने का प्रावधान है लेकिन बीते कुछ सालों से इसका पालन नहीं हो रहा है। निदेशालय का मानना है कि शिक्षकों पर दबाव अधिक होने के चलते वह अपना उत्कृष्ट प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं।
ऐसे में इस शैक्षणिक सत्र से शिक्षकों पर हावी कार्रवाई के दबाव को दूर किया जाएगा। शिक्षकों को बिना किसी दबाव के अपना बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमरजीत कुमार शर्मा ने बताया कि जिस तरह कॉलेज कैडर के शिक्षकों पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती, उसी तरह अब स्कूली शिक्षकों पर भी कार्रवाई नहीं होगी।
शिक्षकों को एक तय शेड्यूल के तहत पढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि हर पंद्रह दिन के बाद स्कूलों में पढ़ाए गए सिलेबस का टेस्ट होगा। बच्चों के पढ़ने और समझने की क्षमता के अनुसार उनके वर्ग बांटे जाएंगे।