तबादलों का खेल खत्म करने में जुटी जयराम सरकार नए सिरे से शिक्षकों के लिए तबादला एक्ट बनाएगी। राजनीतिक विरोध के चलते शिक्षा सचिव की ओर से तैयार प्रस्ताव में संशोधन का फैसला लिया है। संशोधित एक्ट में महिला शिक्षक घर के पास तैनात होंगी और दुर्गम क्षेत्रों में नियुक्त शिक्षकों के लिए भी नियम आसान होंगे। पूरे प्रदेश में एक नियम के तहत तबादले भी नहीं होंगे। तबादला प्रक्रिया में मंत्री-विधायकों से भी राय ली जाएगी।
शिक्षा विभाग के मुताबिक बीते दिनों हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश के 80 हजार से अधिक शिक्षकों के तबादलों के लिए तैयार एक्ट पर चर्चा हुई। कुछ मंत्री जहां इसके पक्ष में हैं, वहीं कुछ मंत्री और विधायकों ने इसका विरोध भी किया है। ऐसे में सरकार ने पुराने प्रस्ताव में संशोधन का फैसला लिया है। नए प्रस्ताव में महिला शिक्षकों को राहत देने की बात कही गई है।
सरकार का मत है कि महिला शिक्षकों को घर से ज्यादा दूर न भेजा जाए। विभागीय अधिकारियों ने बीते पांच माह में बनाए प्रस्ताव में संशोधन करने को कहा है। जेबीटी, क्राफ्ट एंड वोकेशनल, टीजीटी, हेडमास्टर, पीजीटी, प्रिंसिपल (स्कूल-कॉलेज), असिस्टेंट और एसोसिएट प्रोफेसर तबादला एक्ट की जद में आएंगे। जिला कैडर वाले शिक्षकों को जिलों में तथा स्टेट कैडर के शिक्षकों को प्रदेश में कहीं भी भेजा जा सकेगा।
हिमाचल प्रदेश एजूकेशन (रेगुलेशन ऑफ ट्रांसफर ऑफ टीचर) एक्ट -2018 के मसौदे के अनुसार पांच साल से ज्यादा समय तक कोई भी शिक्षक एक स्कूल या कॉलेज में नहीं रहेगा। म्यूचुअल ट्रांसफर (आपस में तबादला) नहीं हो सकेगा।
तबादलों की दृष्टि से हिमाचल के 5 जोन बनाए गए हैं। हर जोन में शिक्षक को सेवाएं देना अनिवार्य है। साफ्टवेयर के माध्यम से शिक्षकों के तबादले का एक्ट भाजपा शासित कई राज्यों ने अपनाया है। हरियाणा इस एक्ट को बखूबी चला रहा है। अब जयराम सरकार पर भी एक्ट लागू करने का दबाव है।