सात मार्च 1955 को शिमला में जन्मे अनुपम खेर अपनी एक्टिंग से सभी को अपना दिवाना बना लेते हैं। शिमला में पले-बढ़े अनुपम का इस शहर से गहरा नाता रहा है।
हिमाचल के छोटे से शहर से बॉलीवुड तक का उनका सफर संघर्षों से भरा रहा है। अनुपम खेर के पिता वन विभाग में क्लर्क के पद पर थे। अनुपम ने शिमला के फागली स्कूल से मिडल तक की शिक्षा के बाद लक्कड़ बाजार स्कूल से दसवीं तक शिक्षा हासिल की। इसके बाद संजौली महाविद्यालय में आगे की शिक्षा ग्रहण की।
अनुपम खेर को उनके दोस्त बिट्टू कहकर बुलाते थे। कॉलेज के दौरान ही अनुपम का रंगमंच की तरफ रुझान बढ़ा। दोस्तों के साथ कभी युवा महोत्सव तो कभी कॉलेज के कार्यक्रमों में नाटक मंचन किया। एक बार तो घर से पैसे चोरी करके ऑडिशन देने के लिए गए थे और जिसके लिए उन्हें बहुत डांट भी पड़ी थी।
दिल्ली के नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा यानी (एनएसडी) से ग्रेजुएशन करने के बाद अनुपम ने थियेटर से करियर की शुरुआत की। साल 1982 में आई फिल्म 'आगमन' से उनके फिल्मी करियर की शुरुआत हुई। लेकिन साल 1984 में आई फिल्म 'सारांश' में उनके काम को सराहना मिली। इस फिल्म में अनुपम ने एक 60 साल के बूढ़े व्यक्ति का किरदार निभाया था
उस वक्त अनुपम खेर खुद महज 30 साल के थे। 60 साल का व्यक्ति किस तरह से सोचता है, कैसे उठता-बैठता है और उसके बोलने का तरीका क्या है, अनुपम ने इसे बखूबी निभाया। इस फिल्म के बाद अनुपम अलग-अलग तरह के रोल में दिखते रहे। अनुपम खेर इंडस्ट्री के ऐसे अभिनेता हैं जो अपने किरदार को खुद में अंदर तक उतार लेते हैं।