ब्रेन स्ट्रोक के खतरे को नजरअंदाज करना जानलेवा साबित हो सकता है। डॉक्टरों ने इस बीमारी पर ताजा रिपोर्ट दी है जिसमें बचाव के भी उपाय दिए गए हैं। आइए जानते हैं ब्रेन स्ट्रोक का खतरा कब ज्यादा होता है और इससे कैसे बचा जा सकता है-
डॉक्टरों के अनुसार आयु बढ़ने के साथ साथ ब्रेन स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। अनुमान के मुताबिक हर छह सेकंड में एक व्यक्ति ब्रेन स्ट्रोक की चपेट में आ रहा है। चिकित्सकों का कहना है कि ब्रेन स्ट्रोक होने के तीन घंटों के भीतर मरीज को अस्पताल पहुंचाना चाहिए।
चिकित्सकों का कहना है कि स्ट्रोक के कारण व्यक्ति के मुंह हाथ और बाजू पर गहरा प्रभाव पड़ता है। जिसे आम भाषा में अधरंग या पक्षाघात भी कहा जाता है। हिमाचल में औसतन इस रोग के पंद्रह से बीस हजार के करीब मरीज हैं। जबकि प्रत्येक वर्ष पांच से दस हजार नए लोग इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। चिकित्सकों के मुताबिक स्ट्रोक होने पर व्यक्ति के दिमाग में खून का बहाव रुक जाता है, जिससे कि ऑक्सीजन नही पहुंच पाती।
डांक्टरों का कहना है कि ब्रेन स्ट्रोक को कम करने के लिए तथा उससे बचने के लिए व्यक्ति को धूम्रपान छोड़ना चाहिए। जबकि बीपी को कंट्रोल करने से 40 प्रतिशत दर कम किया जा सकता है। वहीं शुगर का उचित इलाज मिलने से बचा जा सकता है।
जिन लोगों का वजन ज्यादा है। उन्हें अपने वजन को कंट्रोल करना चाहिए। इसके अलावा रोजाना आधे घंटे सैर करनी चाहिए।