समूचा विश्व जब वैश्विक महामारी कोरोना वायरस से जूझ रहा है, ऐसे में हिमाचल के फार्मा उद्योग अपनी अहम भूमिका निभा रहे हैं। अमेरिका जैसे देश को हाइड्रोक्सीक्लोरोक्विन दवा देने में प्रदेश के फार्मा उद्योग ने जहां अपना योगदान दिया है, वहीं अब बीबीएन स्थित ग्लेनमार्क फार्मास्युटिकल्स कंपनी फैबिफ्लू नाम से कोरोना की दवा बाजार में उतारी जा रही है।
केंद्र से मंजूरी के बाद हिमाचल दवा नियंत्रण प्राधिकरण ने भी बीबीएन की ग्लेनमार्क कंपनी को निर्माण की स्वीकृति दे दी है। अब कोविड-19 रोगियों के इलाज के लिए अरसरदार मानी जा रही एंटी वायरल दवा फेविपिराविर (फैबिफ्लू) का निर्माण भी प्रदेश के बीबीएन में होगा और 200 मिलीग्राम की टैबलेट तैयार होंगी।
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हाइड्रोक्सीक्लोरोक्विन
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कोरोना उपचार के लिए पहले प्रभावी मानी जाने वाली हाइड्रोक्सीक्लोरोक्विन दवा के निर्माण में भी सूबे के करीब 50 लाइसेंसी उद्योगों ने योगदान किया है। ग्लेनमार्क फार्मास्युटिकल्स ने कोविड-19 से हल्के और मध्यम रूप से पीड़ित मरीजों के इलाज के लिए एंटी वायरल दवा फेविपिराविर को फैबिफ्लू ब्रांड नाम से पेश किया है।
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राज्य दवा नियंत्रक नवनीत मारवाह
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कोविड-19 के इलाज के लिए पहले फेविपिराविर दवा है, जिसे मंजूरी मिली है। राज्य दवा नियंत्रक नवनीत मारवाह ने बताया कि ग्लेनमार्क फार्मास्युटिकल्स कंपनी अपनी बद्दी इकाई में एंटी वायरल दवा फेविपिराविर की 200 मिलीग्राम मात्रा वाली टैबलेट का निर्माण करेगी, जिसके लिए नई दवा होने के चलते केंद्र से मंजूरी मिलने के बाद प्रदेश प्राधिकरण ने भी मंजूरी दे दी है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में हाइड्रोक्सीक्लोरोक्विन दवा की भी कोई कमी नहीं है। जिस भी दवा की मांग आएगी, हिमाचल के उद्योग उसे पूर्ण करने में सक्षम व मजबूत है।