अवसाद के मामले लगातार बढ़ रहे हैं जोकि समाज के लिए चिंता का विषय है। वर्तमान रहन-सहन, नशे के बढ़ते प्रभाव, मोबाइल के अधिक प्रयोग और पारिवारिक समस्याओं के चलते लोग अवसाद यानी डिप्रेशन का अधिक शिकार हो रहे हैं।
अवसाद के शिकार हुए लोग अपनी जीवन लीला तक समाप्त कर लेते हैं। ऐसे में यह समाज के लिए चिंतनीय विषय है। डिप्रेशन के लक्षण शुरूआत में ही पता चलने पर इसका काउंसलिंग से भी इलाज किया जा सकता है, लेकिन यदि लक्षणों के बाद देर हो जाए तो मरीज की स्थिति के हिसाब से उपचार होता है।
अमूमन साढ़े चार से छह माह का पहला दवाई कोर्स चलता है। अगर लक्षण होने के बावजूद मरीज या उसके परिजन तुरंत चिकित्सक को नहीं दिखाते हैं तो इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
डिप्रेशन के मुख्य कारण पारिवारिक समस्याएं या जिम्मेदारी बढ़ने, नशे की लत, मौसम में बदलाव, परीक्षाएं, मोबाइल फोन और अकेलापन आदि प्रमुख हैं। इससे मुख्यतया 20 से 40 साल तक और 60 से अधिक वर्ष वाले लोग ग्रस्त होते हैं।
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डॉ. संदीप कुमार
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किसी भी प्रकार के तनाव को करीबियों से साझा कर भी डिप्रेशन से बचा जा सकता है। अगर तनाव या अपनी समस्या को मन में ही रखेंगे तो फिर अवसाद का शिकार होंगे। अवसाद में मनुष्य आत्महत्या तक करता है। डॉ. राधा कृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर के मनोरोग चिकित्सक डॉ. संदीप कुमार ने कहा कि डिप्रेशन वर्तमान में घातक बीमारी बनता जा रहा है। उन्होंने लक्षण पाए जाने पर तुरंत चिकित्सक को दिखाने की अपील की है।