हिमाचल में पहली तारीख को कर्मचारियों के खातों में सैलरी तो आ गई, लेकिन उनके हाथ 2, 5 और 10 हजार रुपये ही आए। बैंकों में भीड़ तो नहीं रही, लेकिन कैश की कमी के कारण सैलरी का कुछ हिस्सा ही निकाल पाए। राजधानी शिमला, ऊना, हमीरपुर, कांगड़ा और अधिकतर शहरों में ऐसे ही हालात थे। वीरवार को एटीएम भी खाली ही थे, ऐसे में कर्मचारी मायूस होकर ही लौटे। जिन कर्मचारियों के हाथ 2 हजार रुपये ही लगे उनका कहना है कि दफ्तर छोड़कर रोजाना क्या बैंकों में लाइनों में ही लगे रहेंगे। एडीएम पीएनबी हमीरपुर अवतार सिंह का कहना है कि बैंकों में कैश की कमी के चलते दिक्कत पेश आ रही है।
तस्वीरें: पहले ही दिन पगार के लिए तरसे कर्मचारी, एटीएम भी रहे खाली
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सभी कर्मचारियों को 24 हजार कैश दे दिया तो बैंक में संकट हो जाएगा। शीघ्र ही स्थिति सामान्य हो जाएगी। अतिरिक्त मुख्य सचिव श्रीकांत बाल्दी ने आरबीआई के अधिकारियों से कर्मचारियों को डिमांड के अनुसार राशि जारी करने के लिए कहा है। मंडी जिले के थुनाग के ग्रामीण बैंक से सैलरी खाते से पैसे नहीं मिल पा रहे हैं। यहां एटीएम 10 अक्तूबर से बंद पड़े हैं। थुनाग स्कूल के अध्यापक मुरारी लाल शर्मा ने बताया कि गत माह का राशन भी दुकान से उधार लिया है। इस माह भी बैंकों में कैश नहीं मिल पा रहा है। सराज के अधिकतर बैंकों में पैसे नहीं हैं। जंजैहली के एक मात्र राष्ट्रीयकृत बैंक में दोपहर तक कैश खत्म हो गया।
बैंकों ने कर्मचारियों और पेंशनरों की जेब भरने के लिए आम जनता की जेबें खाली कर दी। बैंकों ने वेतन देने के लिए सारा कैश अपनी शाखाओं में ही रखा और एटीएम पूरी तरह से खाली रखे। शहर और इसके उपनगरों के करीब 95 फीसदी एटीएम आउट ऑफ आर्डर रहे। नोटबंदी के बाद जिले के पचास हजार कर्मी सैलरी को लेकर संशय में थे। सिरमौर जिले में पहली तारीख को सैलरी निकालने के लिए कर्मचारियों और पेशंनरों की भारी भीड़ उमड़ी। विभिन्न बैंकों में लोगों की भीड़ जुटी थी। सबसे अधिक भीड़ कॉपरेटिव बैंक में देखी गई। हालांकि बैंक प्रबंधनों द्वारा कर्मचारियों के लिए दस-दस हजार रुपये देने का प्रावधान किया गया था। लेकिन, एटीएम से सेलरी निकालने वाले महज 2000 रुपये ही निकाल पाए।
हमीरपुर जिले में कैश की कमी के चलते सरकारी और अर्ध सरकारी कर्मचारी बैंकों से पूरा वेतन नहीं निकाल पाए। अधिकतर कर्मचारियों को बैंकों से 6 से 10 हजार के बीच ही भुगतान हो पाया। बैंक प्रबंधकों का कहना है कि अगर सभी कर्मचारियों और पेंशनरों को 24 हजार का भुगतान किया जाए, तो अधिकांश बैंकों में कैश बिल्कुल खत्म हो जाएगा। जिससे आपातकाल में उपभोक्ताओं को भुगतान करने में दिक्कतें पेश आ सकती हैं। हालांकि जिन परिवारों में शादी कार्यक्रम या बीमार हैं, उन्हें जरूरत के हिसाब से भुगतान किया गया। बुधवार को लीड बैंक ने जिले के 164 बैंक शाखाओं में दो करोड़ रुपये भेजे थे। वहीं जिले में करीब 70 हजार से अधिक कर्मचारी हैं, जिन्हें बैंकों के जरिए वेतन प्राप्त होता है। उधर, एडीएम पीएनबी अवतार सिंह ने कहा कि बैंकों में कैश की कमी के चलते दिक्कतें पेश आ रही हैं, लेकिन शीघ्र ही स्थिति सामान्य हो जाएगी।
चंबा जिले में वेतन और पेंशन भुगतान की आफत पहले दिन ज्यादा भारी नजर नहीं आई। चंबा के किसी भी बैंक में भीड़ नहीं दिखी। दरअसल, वीरवार को वेतन और पेंशन एक बजे के बाद खातों में पहुंची। जिसके चलते बैंक में भीड़ नहीं जुटी। जो लोग सुबह बैंक तक आए भी वे खातों में नकदी का पता करने के बाद वापस लौट गए। अब बैंकों में भीड़ की सारी उम्मीद शुक्रवार पर टिक गई है। सेंट्रल बैंक चंबा की प्रबंधक शिल्पी ने बताया कि उनके बैंक ने वेतन और पेंशन के लिए एक दिन पहले ही सभी इंतजाम कर दिए थे। दिन भर काम रूटीन में चलता रहा और किसी तरह की दिक्कत पेश नहीं आई। दूसरी ओर पीएनबी के प्रबंधक राकेश कुमार ने बताया कि वेतन और पेंशन एक बजे के बाद डलने की वजह से भीड़ नहीं उमड़ी। बैंक में किसी तरह की दिक्कत नहीं आई और जो लोग पैसे लेने के लिए पहुंचे उन्हें नियम के हिसाब से भुगतान किया गया।