हिमाचल में भारी बर्फबारी और बारिश के बाद कई जिलों में हिमखंड गिरने का खतरा मंडरा रहा है। हिमाचल में भारी बर्फबारी और बारिश के बाद कई जिलों में हिमखंड गिरने का खतरा मंडरा रहा है। हिमाचल के चार जिले हिमखंड गिरने की दृष्टि से ज्यादा संवेदनशील है।
बीते दिन ही मनाली सोलंग गांव और रोहतांग टनल के बीआरओ कार्यालय के पास आखिरी नाले में हिमखंड गिरा। वहीं, लाहौल के रतोली और त्रिलोकनाथ में गिरे हिमखंड से चिनाब नदी का प्रवाह पिछले 26 घंटे से रुका हुआ है। इससे क्षेत्र के लोग सहमे हुए हैं। आंकड़ों की बात करें तो राज्य के ऊंचाई वाले क्षेत्रों किन्नौर, लाहौल स्पीति, चंबा और कुल्लू में बीते कई सालों से हिमखंड गिर रहे हैं।
मार्च 1979 में लाहौल स्पीति में हिमखंड गिरने से 237 लोगों की जान गई थी।राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के मुताबिक जनवरी 1975 में भूकंप के बाद हिमखंड गिरने से सड़कों को भारी नुकसान हुआ था। मार्च 1978 में लाहौल स्पीति में हिमखंड गिरने से 30 लोगों की जान गई थी। इसके अलावा किन्नौर में हिमखंड गिरने से करीब चार महीनों तक सड़क मार्ग बंद रहे थे।
सितंबर 1995 में भी हिमखंड गिरने से बाढ़ आई थी। इससे भी सड़कों को भारी नुकसान हुआ था। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण शिमला के अनुसार इस साल जनवरी और महीने के दौरान प्रदेश में हिमखंड गिरने की 33 घटनाएं हो चुकी हैं। जान का नुकसान बीते दिनों किन्नौर में गिरे हिमखंड की घटना में ही हुआ है।
बीते दिनों भारत-चीन सीमा से सटे शिपकिला के गांव नमज्ञा के साथ लगते डोगरी नाले में जम्मू-कश्मीर राइफल के पांच जवान हिमखंड के नीचे दब गए। जवानों को खोजने का काम युद्धस्तर पर चला है।