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Year Ender 2022: तीन महीने में तीन बड़ी हिंसा, इन 'दंगों' ने बिगाड़ा सौहार्द, घरों में कैद हो गए थे हजारों लोग

Thu, 29 Dec 2022 01:22 PM IST
Udit Dixit उदित दीक्षित
Updated Thu, 29 Dec 2022 01:22 PM IST
सार

Year Ender 2022: तीन महीने में तीन बड़ी हिंसा, इन 'दंगों' ने बिगाड़ा सौहार्द, घरों में कैद हो गए थे हजारों लोग

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Rajasthan Violence History Know About year 2022 Violence Cases In Rajasthan Year Ender 2022
इन घटनाओं ने बिगाड़ा सामाजिक सौहार्द। - फोटो : अमर उजाला

हम बहुत जल्द साल 2022 को अलविदा कहने वाले हैं। 31 दिसंबर की रात पूरी दुनिया जश्न में डूबी होगी और नए साल 2023 का स्वागत कर रही होगी। अच्छी और बुरी यादों के साथ हम नए साल में प्रवेश कर जाएंगे। बीतते समय के साथ हमारी यादें कुछ धुंधुली पड़ जाती हैं, ऐसे में 'अमर उजाला' यादें 2022 सरीज लेकर आ रहा है। इस सीरीज में हम अच्छी-बुरी यादें ताजा करेंगे। कई घटनाएं ऐसी होंगी जो हमें दहला देंगी कुछ हमें हंसा देंगी तो कुछ हैरान कर देंगी। अमर उजाला की चौथी सीरीज में हम राजस्थान के चार दंगों के बारे में जानेंगे, जो देशभर में चर्चा का कारण बने...।

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करौली में जमकर हुई थी आगजनी। - फोटो : सोशल मीडिया

दो अप्रैल: बाइक रैली के पर पथराव के बाद बिगड़े हालात  
राजस्थान के करौली में हिंदू नववर्ष पर निकाली गई बाइक रैली पर विशेष समुदाय के लोगों ने पथराव कर दिया था। इससे शहर के हटवारा बाजार में हिंसा भड़क गई और हालात काबू से बाहर हो गए। उपद्रवियों ने 35 से अधिक दुकानों, मकानों और बाइकों को आग के हवाले कर दिया। प्रशासन ने हालात काबू करने के लिए शहर में धारा 144 लागू कर दी, लेकिन हालात नहीं संभले। इसके बाद कर्फ्यू लगााकर इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई थी। इस हिंसा में पुलिसकर्मियों सहित 43 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। करीब 15 दिन तक शहर में कर्फ्यू लगा रहा और हजारों लोग घरों में कैद रहे थे। 

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अलवर में तोड़ा गया था शिव मंदिर। - फोटो : अमर उजाला

17 अप्रैल: मंदिर तोड़ने के मामले ने पकड़ा तूल 
अलवर जिले के राजगढ़ में 300 साल पुराने शिव मंदिर को तोड़ने के बाद विवाद बढ़ गया था। हिंदू समाज, साधु-संत और भाजपा सड़क पर उतर आई थी। दरअसल, राजगढ़ में 17 और 18 अप्रैल को 300 साल पुराने शिव मंदिर के साथ दो अन्य मंदिर भी तोड़े गए थे। नगरपालिक का कहना था कि नाले पर बने एक मंदिर में स्थापित मूर्तियों को निर्माणकर्ताओं ने खुद ही हटा लिया था। दूसरे मंदिर का नगण्य और आंशिक हिस्सा ही हटाया गया। वहीं, तीसरा मंदिर किन्नरों का था जिसे भी तोड़ दिया गया था। नगरपालिका की इस कार्रवाई के बाद मामले ने तूड़ पकड़ लिया था। लोगों ने सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया था, लेकिन राहत की बात यह थी कि इस दौरान हालात काबू से बाहर नहीं हुए थे।

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जोधपुर में भी बिगड़े थे हालात। - फोटो : सोशल मीडिया

दो मई: धार्मिक झंडा हटाने को लेकर भिड़े दो पक्ष 
जोधपुर में परशुराम जयंती के उपलक्ष्य में रैली निकाली गई थी। इसके लिए शहर के जालोरी गेट चौराहे पर धार्मिक झंडे लगाए गए थे। दो मई की देर रात ईद को लेकर समाज के लोगों ने इसी चौराहे पर अपने धर्म के झंडे लगाने की कोशिश की। लोग वहां पहले से लगे झंडों को हटाकर अपने झंडे लगाने लगे। दूसरे समुदाय के कुछ लोगों ने इसका विरोध किया तो विशेष समुदाय के लोगों ने एक युवक के साथ मारपीट कर दी। इसकी जानकारी मिलते ही मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई। भीड़ ने नमाज के लिए लगाए गए लाउडस्पीकरों के पोल तोड़ दिए। दोनों समुदाय आमने-सामने आ गए और पत्थरबाजी करने लगे। हालात काबू करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज कर आंसू गैस के गोले दागे। शहर के दस थाना इलाकों में कर्फ्यू लागू कर दिया गया है। करीब सात-आठ दिन तक यहां कर्फ्यू लगा रहा। इस हिंसा में भी पुलिसकर्मी सहित कई लोग घायल हुए थे।  

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उदयपुर हत्याकांड। - फोटो : अमर उजाला

कन्हैयालाल हत्याकांड जिसने देश को दहला दिया 
28 जून को उदयपुर में दो मुस्लिम युवकों ने कन्हैयालाल साहू की गला काटकर हत्या कर दी थी। कन्हैयालाल धानमंडी इलाके के भूत महल क्षेत्र में रहते थे और पेशे से दर्जी थे। हत्याकांड वाले दिन दो मुस्लिम युवक कपड़े का नाप देने के बहाने उनकी दुकान पर पहुंचे और धारदार हथियार से कन्हैयालाल पर वार करना शुरू कर दिया। हत्यारों के ताबड़तोड़ हमलों ने कन्हैयालाल को संभलने का भी समय नहीं मिला। लगातार वार से कन्हैयालाल की गर्दन कट गई और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। इस हमले में दर्जी कन्हैयालाल की दुकान पर काम करने वाले ईश्वर सिंह भी गंभीर रूप से घायल हो गए थे। लेकिन, अब वह पूरी तरह स्वस्थ्य हैं। कन्हैयालाल की हत्या के बाद हत्यारे मोहम्मद रियाज और गौस मोहम्मद ने एक वीडियो जारी किया था। जिसमें उन्होंने धमकी देते हुए कहा था कि हमारे धर्म का अपमान करने वालों का यही अंजाम होगा। इधर, हत्या के कुछ देर बाद हिंदू संगठनों ने इलाके में विरोध शुरू कर दिया। हिंसा की आशंका को देखते हुए शहर में इंटरनेट बंद किया गया फिर सात थाना क्षेत्रों में कर्फ्यू भी लगा दिया था। इस हत्याकांड ने राजस्थान ही नहीं, पूरे देश को दहला दिया था। देशभर में घटना को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहा था।  

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